इसके अलावा रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट और श्री अमरनाथ यात्रा शुरू होने पर भी टैक्सी वालों का काम खूब चलता था। यह सब खत्म हो चुका है। करीब एक साल टैक्सी वालों को काम पर लौटने की उम्मीद भी नहीं है। सरकार ने अभी तक टैक्सी से जुड़े हजारों लोगों के परिवारों की सुध नहीं ली है।
बिना काम के टैक्सी के लोन की किश्त, इंश्योरेंस, पार्किंग फीस और टैक्सी की देखभाल कैसे करें। कम से कम सरकार एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर टैक्सी का पार्किंग शुल्क जो लाखों में है, उसे छह महीने के लिए माफ कर दे। अन्य ट्रांसपोर्टरों, जिसमें बस आपरेटरों की हालत भी ऐसी ही हैं।
कुछ समझ नहीं आ रहा
दिहाड़ी मजदूर सुरेंद्र कुमार का कहना है कि कंस्ट्रक्शन वर्क बंद होने से रोजी रोटी का संकट बन गया है। क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा।
पंडित विशाल शर्मा का कहना है कि पिछले दो महीने से ज्यादा समय से काम नहीं हैं। सरकार को पुजारियों की भी सुध लेनी चाहिए। सरकार को आर्थिक पैकेज पंडितों को भी देना चाहिए।
हर वर्ग का खयाल रखने की जरूरत
कांग्रेस के सचिव नीरज गुप्ता का कहना है कि कुछ लोग लॉकडाउन में मनमानी कर मुनाफाखोरी कर रहे हैं, तो कुछ को रोजी रोटी तक का संकट है। सरकार और प्रशासन को मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही हर वर्ग का खयाल रखना चाहिए।