कई दिनों से पठानकोट के नौ कैंपों में रह रहे जम्मू-कश्मीर के लगभग 1400 लोगों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। 15 से 22 दिनों से पठानकोट में फंसे लोगों ने बुधवार को खाना-पीना छोड़ दिया। लोगों का कहना है कि 14 दिन की क्वारंटीन अवधि खत्म होने के बावजूद उन्हें घर नहीं जाने दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनके घर वापसी के आदेश जारी नहीं होंगे वह खाना नहीं खाएंगे। उन्होंने कहा कि, 14 दिन उन्होंने कानून का पालन किया पर अब सब्र का बांध टूट गया।
बता दें, 22 दिन पहले लॉकडाउन के बाद देश के विभिन्न राज्यों में कामकाज के लिए गए कश्मीरी अपने-अपने घरों को लौट रहे थे। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लखनपुर में प्रदेश की सीमा को पूर्ण तरह से सील कर दिया। जिसके बाद पंजाब और जम्मू-कश्मीर सीमा पर प्रवासी लोगों का जमावड़ा लग गया। 4-5 दिन में 1500 के करीब लोग सीमा पर जुट गए, लेकिन जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्हें राज्य में प्रवेश की अनुमति नहीं दी।
डीसी पठानकोट और कठुआ प्रशासन ने तय किया कि लोगों को पठानकोट में ही क्वारंटीन किया जाए। प्रशासन ने एसीपी पैलेस सुजानपुर, आरएसडी गार्डन सुजानपुर, पूजा रिजॉर्ट सरना, केशव हाल शाहपुरकंडी, उप्पल रिजॉर्ट, ताज गार्डन और इसरो पैलेस समेत 9 स्थानों पर इन लोगों के ठहरने, खाने-पीने का बंदोबस्त किया है।
लोगों ने की उपराज्यपाल से दखल देने की मांग
फंसे हुए लोगों में शामिल शाहिद, जावेद इकबाल और करीम ने बताया कि वह पुंछ के रहने वाले हैं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल इस मामले में दखल दें और सभी लोगों को उनके घरों तक पहुंचाएं। अन्यथा कोई शरणार्थी खाना नहीं खाएगा।