टूटे घर, बिखरी इंटें और जगह-जगह मिलते मोर्टार के हिस्से। हर जगह बारूद की गंध.... कुछ ऐसा हो गया है जीरो लाइन से लगभग छह किलोमीटर दूर परगवाल गांव का हाल जो पहली बार पाकिस्तानी गोलाबारी का निशाना बना है। हालांकि, यहां कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन कई मकानों को नुकसान पहुंचा है।
खास बात यह है कि पाकिस्तान के गोले जहां भी गिरे हैं वह या तो सड़क पर गिरे या बिल्कुल सड़क किनारे के घर पर। तीन स्थानों पर तो सड़क पर गोले गिरने के निशान भी हैं। गांव में घुसते ही सबसे पहले साहिल के घर के आगे सड़क पर गोले गिरे हैं। इससे घर की दीवारों पर गोले के छर्रे के निशान हैं। घर के बाहर खड़ी बोलेरो गाड़ी व ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त हो गई और तीन मवेशी मारे गए। यह घर सेना के कैंप से महज 50 मीटर की दूरी पर है।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि पाक रेंजरों के निशाने पर यह कैंप हो सकता था। गंधर्व आर्मी स्कूल को भी निशाना बनाया गया। स्कूल की दीवार गोलों के छर्रे से छलनी हो गई है। कुछ दूरी पर सड़क पर गोले गिरकर फटने से सरकंडे में आग लग गई। पास में ही प्रदीप सिंह का मकान है। इनके मकान में गोला गिरने से एक कमरे में बड़ा सुराख बन गया है। यह संयोग था कि जिस समय गोला गिरा उस समय उस समय कमरे में कोई मौजूद नहीं था। एक अन्य निर्माणाधीन मकान भी गोला गिरने से क्षतिग्रस्त हो गया है।
1965 व 1971 के युद्ध में शामिल रहे गांव निवासी पूर्व सैनिक हिम्मत सिंह का कहना है कि पाकिस्तान की किस बात का भरोसा किया जाए। अभी सीजफायर उल्लंघन न करने पर सहमति बनी और उसने फिर गोलाबारी कर दी। कहते हैं कि मोदी सरकार को आर-पार की लड़ाई करनी चाहिए। कब तक आखिर यह सब सहते रहेंगे। यहां कभी नहीं गोलाबारी हुई थी, लेकिन इस बार तो गोलों की बरसात हो गई।
सहमी गुड़िया झरोखे से निहारती रही
पाकिस्तान गोले से क्षतिग्रस्त प्रदीप सिंह के मकान के बगल में ही उनके भाई राज सिंह का घर है। उनकी तीन साल की मासूम बेटी गुड़िया गोलाबारी से डरी सहमी हुई है। इनके मकान के खिड़की के शीशे भी धमाके से टूट गए हैं। घर के अंदर दुबकी गुड़िया टूटी खिड़की से ही सारा माजरा निहार रही है। घर से बाहर निकलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
डर के मारे छोड़ चले गांव
परगवाल और कानाचक्क क्षेत्र में पाक की ओर से की गई गोलीबारी के डर से सांबा क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों के लोग भी सुरक्षित स्थानों की ओर रवाना हो गए हैं। कई ग्रामीणों को अपने छोटे वाहनों पर जाते हुए देखा गया है। कई ट्रैक्टर ट्रालियों के माध्यम से भी गांव से निकल रहे हैं। ग्रामीणों को यही चिंता सता रही है कि पाक गोलीबारी से कहीं किसी की जान ही न चली जाए जिसे लेकर वह पहले से ही अपनी तैयारी कर रहे हैं।
तहसील राजपुरा के अंतर्गत आने वाले गांव चक सद्दा, सदबाल के लोग भी सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से भी लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को कहा गया है। इन लोगों के लिए चीची माता मंदिर, मनोहर गोपाला व राजपुरा में विस्थापित शिविर बनाए गए हैं।