उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत दो और सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में फरहत अली खांडे और शफी डार शामिल हैं। रामबन निवासी फरहत शिक्षा विभाग में तो बांदीपोरा का शफी ग्रामीण विकास विभाग में तैनात था। दोनों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे।
अधिकारियों के अनुसार जांच में आतंकियों से संबंध के आरोपों की पुष्टि के बाद यह कार्रवाई की गई है। फरहत हिजुबल मुजाहिदीन के लिए काम करता था। वह हिजबुल के लिए धन जुटाता था। वह स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश कर आतंक की राह पर चलने के लिए भी उकसाता था। फरहत रामबन और आसपास के इलाकों में आतंकी नेटवर्क को फिर से खड़ा करने में लगा हुआ था।
अधिकारियों के अनुसार शफी डार लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों का मददगार था। पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर वह आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराता था। शफी को उसके पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी। अधिकारियों के अनुसार फरहत और शफी सरकारी तंत्र में बैठकर आतंकियों व अलगाववादियों की विचारधारा को फैलाने का काम करते थे। इस कार्रवाई को उपराज्यपाल प्रशासन ने सफेदपोश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति बताया है। यह भी कहा गया है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इन दोनों के खिलाफ साक्ष्य जुटा रही थीं।
अब तक 90 कर्मचारियों को उपराज्यपाल कर चुके बर्खास्त
उपराज्यपाल प्रशासन ने पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों के मददगार सरकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की है। बर्खास्त करने के साथ-साथ उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है। इस कार्रवाई के साथ ही पिछले पांच वर्षों में आतंकी व अलगाववादी गतिविधियों में शामिल 90 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किए जा चुके हैं।