पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को पूर्ण अधिकार देने के साथ ही उन्हें जमीनों का मालिकाना हक दिलाया जाएगा। यह वादा सीमावर्ती गांव चकरोई में एक कार्यक्रम के दौरान उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया। उन्होंने कहा कि वंचितों को यह हक काफी पहले मिल गया होता, लेकिन निजी कानूनों ने रुकावट डाली।
आरएस पुरा में एलजी ने कहा, पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने पर आजादी के 75 साल बाद नागरिकता मिली। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के 5350 परिवारों को राज्य की नागरिकता देकर इन लोगों के साथ हो रही अनदेखी दूर की।
प्रदेश में 24 स्वरोजगार योजनाओं से इन परिवारों के पढ़े-लिखे युवा ऋण लेकर लघु उद्योग स्थापित कर पाएंगे। डोमिसाइल प्रमाणपत्र मिलने से राज्य में सरकारी नौकरी प्राप्त कर सकेंगे। भविष्य में भेदभाव की पीड़ा दूर करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से शिविर लगाकर प्रभावित परिवारों को राहत राशि मुहैया करवाई जाएगी।
कृषि योग्य भूमि के साथ आवासीय जमीन का शरणार्थियों को मालिकाना हक दिया जाएगा। प्रदेश की 4290 पंचायतों को 939 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मुहैया कराने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार महासंपर्क योजना के तहत 29 परियोजनाएं बनाकर 5013 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है।
ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बिजली, पानी, स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाएं मिल सकें। कार्यक्रम में सिन्हा ने योजनाओं के अंतर्गत लाभ पाने वाले लाभार्थियों को चेक और प्रमाणपत्र वितरित किए। इस दौरान सरकारी विभागों की ओर से लगाए गए स्टाॅलों का उप राज्यपाल ने निरीक्षण किया।
रिफ्यूजियों को सही मायने में 2019 में मिली आजादी : भारत भूषण
कार्यक्रम में जिला विकास परिषद जम्मू के अध्यक्ष भारत भूषण ने में कहा, देश तो 1947 में आजाद हुआ था, लेकिन पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को सही मायनों में वर्ष, 2019 में आजादी मिली। देश के विभाजन के समय अपना सब कुछ छोड़कर जम्मू-कश्मीर आने पर यहां की सरकारों ने इन लोगों को अधिकारों से वंचित रखा।
73 वर्षों से लोकसभा चुनाव में ही मतदान करने का अधिकार था। लेकिन पांच अगस्त, 2019 को विधानसभा और पंचायत चुनाव में भी इन्हें शामिल किया गया। कहा कि वोट की राजनीति के कारण शरणार्थियों की बस्तियों की हालत आज भी बदहाल है।
अब लोगों को इंसाफ मिलने के साथ बस्तियां भी बेहतर हो पाएंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने इनके अधूरे सपने पूरे करने का काम किया, जिससे शरणार्थियों को नागरिकता का हक मिला
प्रधानमंत्री ने समझा रिफ्यूजियों का दर्द : लब्बा राम
पश्चिमी पाकिस्तान रिफ्यूजी संगठन के प्रधान लब्बा राम गांधी ने कहा कि उन्हें पहले सरकार के पास जाना पड़ता था। अब सरकार उनका दर्द सुनने के लिए शिविर लगा रही है। मतदाता सूचियों में नाम होने से डोमिसाइल प्रमाणपत्र बन पाया है।
यह सब प्रधानमंत्री की नीतियों का परिणाम है, जिन्होंने शरणार्थियों का दर्द समझा। मौके पर मंडलायुक्त रमेश कुमार, डीसी अवनी लवासा, सुचेतगढ़ से डीडीसी सदस्य तरनजीत सिंह टोनी, बीडीसी सदस्य तरसेम सिंह और आरएस पुरा से बीडीसी सदस्य तरसेम शर्मा भी आदि मौजूद थे।