अगस्त 2019 के बाद लोग जम्मू-कश्मीर में बदलाव महसूस कर रहे हैं। कुछ लोगों की ओर से बाधाएं खड़ी किए जाने के बावजूद, 2047 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपने में केंद्र शासित प्रदेश को भी शामिल किया जा सके, यह सुनिश्चित करने के हम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच रहे हैं।
यह बात उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने वीरवार को एक कार्यक्रम में कही। मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द कर दिया था और राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था।
उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर प्रधानमंत्री के उस सपने का हिस्सा बने जिसे उन्होंने 2047 में भारत के लिए देखा है। हम चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर का योगदान दूसरों से कम न हो। जम्मू-कश्मीर में जमीनी हालात में बदलाव न केवल दिखाई दे रहे हैं, बल्कि लोग भी इसे महसूस कर रहे हैं।
आने वाले समय में घरों की छतों पर तिरंगा लहराएगा। पुलवामा जो कभी आतंकवादी हमले की घटना के चलते पहचाना जाता था, यहां बीते वर्ष 13 और 14 अगस्त को 10,000 लोगों ने तिरंगे के साथ रैली निकाली थी। यह एक बड़ा बदलाव है।
अब नहीं होती अलगाववादियों की ओर से प्रायोजित हड़ताल
सिन्हा ने कहा, अब अलगाववादियों की ओर से प्रायोजित कोई हड़ताल नहीं होती। सिनेमा हॉल फिर से खुल गए हैं। जम्मू-कश्मीर सड़क परिवहन निगम ने रात की बस सेवा शुरू कर दी है। लोगों को देर रात भी डल झील में शिकारा की सवारी का आनंद लेते देखा जा सकता है।