उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सुरक्षाबलों पर उंगली उठाने और निर्दोष लोगों की हत्या को जायज ठहराने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि वह तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक केंद्र शासित प्रदेश से आतंकवाद का सफाया नहीं हो जाता। अगर कोई जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने की कोशिश करेगा तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। एलजी मनोज सिन्हा ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।
श्रीनगर के जेवन इलाके में स्थित पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में शुक्रवार को आयोजित स्मृति दिवस समारोह के दौरान उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के बहादुर जवानों की वीरता और उनका अद्वितीय साहस सभी के लिए प्रेरणा है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने से लेकर आपदाओं में सहायता प्रदान करने और कोविड महामारी के दौरान जनता के बचाव के लिए सबसे आगे रहने तक, जम्मू-कश्मीर पुलिस केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के जीवन की सेवा और सुरक्षा के लिए समर्पित है।
शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि आज यह दिन है कि हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि आतंकवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोकना ही अपने वीर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। एलजी ने कहा कि आतंकवाद पर आखिरी प्रहार के दौरान हमें अधिक सावधान रहने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हैं जो साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे तत्वों पर भी पैनी नजर रखनी होगी और सख्ती से उनसे निपटना होगा। कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ की खातिर निर्दोष नागरिकों की हत्याओं को न्यायोचित ठहराने की घिनौनी हरकत भी कर रहे हैं।
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि इस देश में सभी को मौलिक अधिकार है, लेकिन अगर कोई अपनी बयानबाजी और कृत्य से देश की अखंडता के साथ खिलवाड़ करेगा तो देश के सख्त कानून के तहत आने वाले दिनों में उसके खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा, सुरक्षा की चुनौतियां परंपरागत नहीं हैं, सोशल मीडिया और इंटरनेट का दुरुपयोग किस तरह हो रहा है, यह बताने की जरूरत नहीं है। नार्को-टेरर नेटवर्क की नई चुनौती हमारे सामने है।
जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा इस दिशा में काफी प्रभावशाली काम हुआ है। हमें लगातार ‘इफेक्टिव मॉनिटरिंग और क्विक रिस्पांस’ के लिए अपनी रणनीति को विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस तंत्र में नवीनतम प्रौद्योगिकी को शामिल करना होगा। उन्होंने कहा, कोशिश की जाएगी कि आपका परिवार सुविधा और सम्मान के साथ जीवन व्यापन कर सके।
उप राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षाबलों ने धैर्य और दृढ़तापूर्वक आतंकवाद और अलगाववाद का मुकाबला किया है। जम्मू कश्मीर की मिट्टी की एक-एक इंच में हमारे बहादुर सिपाहियों की गौरव गाथा लिखी हुई है। यह जवानों की वीरता और कर्त्तव्य का परिणाम है कि पिछले तीन सालों में पड़ोसी मुल्क और उनके साथ जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने में लगे हुए लोगों को नियंत्रित करने, आतंकवाद और अलगाववाद पर काबू पाने में सफलता मिली है। अमन और आर्थिक विकास की गतिविधियां रफ़जा में महसूस की जा रही है।
यहां के अवाम को प्रगति के पथ पर चलने का मौका मिल रहा है। एलजी ने कहा कि इसके पीछे जवानों का बहुत बड़ा योगदान है, उनकी मुस्तैदी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी ड्यूटी को अंजाम देने का यह परिणाम है कि आज जम्मू-कश्मीर के लोग खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अगर प्रदेश में पर्यटन बढ़ा है तो केवल पर्यटन विभाग के कारण नहीं। जो भाव पैदा किया है हमारे जवानों ने किया। जम्मू कश्मीर सुरक्षित है। इसी कारण देश के कौने-कौने से या दूसरे देशों से यहां लोग आ रहे हैं।
एलजी ने कहा कि हताश होकर हमारा पड़ोसी पाकिस्तान और उसके इशारों पर काम करने वाले कुछ लोग निर्दोषों को निशाना बना रहे हैं। कुछ लोग तो यहां भड़काने का काम कर रहे हैं। जो लोग भी जम्मू कश्मीर में अमन और विकास की राह में रुकावट डालने का काम प्रयास कर रहे हैं, उन्हें मैं कहना चाहता हूं कि कायरतापूर्ण किये जाने वाले इन हमलों की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। निर्दोष नागरिकों और शहीदों के परिवार वालों के आंसुओं का हिसाब जरूर होगा।
एलजी ने कहा कि हाल ही में हुई घटनाओं पर जम्मू कश्मीर के अवाम ने अपना रोष जताया है। उससे मुझे भरोसा हो रहा है कि आतंकवाद की सांसें अब चंद दिन की ही बची हुई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस स्मरणोत्सव दिवस उन पुलिस बलों के बहादुर दिलों को याद करने का भी अवसर है, जिन्होंने लद्दाख के बर्फ से ढके पहाड़ों पर देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, मैं जम्मू-कश्मीर पुलिस के 1604 बहादुर सैनिकों को सलाम करता हूं, जिन्होंने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। देश की सेवा और समर्पण की गाथाओं को अमर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि श्रीनगर में ‘गौरव स्तम्भ’ हमारे शहीदों की वीरता और बलिदान के प्रतीक के रूप में काम करेगा और मुझे विश्वास है कि उनके साहस की कहानियां हर नागरिक को प्रेरित करेंगी।