उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान के उकसावे पर घाटी में पत्थरबाजी करने वाले अलगाववादी और आतंकवादी संगठनों का अस्तित्व इतिहास के पन्नों में सिमट कर रहा गया है। जम्मू-कश्मीर का तेजी से विकास हो रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के चार साल बाद शांति यहां के लोगों का मूलमंत्र बन चुकी है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मनोज सिन्हा ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण के पूरा होने के बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने पर फैसला चुनाव आयोग को लेना है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन चुनाव आयोग के फैसले का पालन करेगा। विभिन्न स्थानीय निकायों के 32 हजार से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि केंद्र शासित प्रदेश में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
कश्मीरी पंडितों की हत्याएं होने के एक सवाल के जवाब में सिन्हा ने कहा कि ऐसे मामलों में गिरावट आई है। मोदी सरकार ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को माफ करने वाली नहीं है। कहा कि हम ऐसा माहौल बनाने के लिए काम कर रहे हैं कि ऐसी कोई घटना न हो। इसके बावजूद कई बार छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद विधानसभा चुनाव होंगे और जम्मू-कश्मीर को भी उचित समय पर राज्य का दर्जा भी मिलेगा। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर जो लोग सांविधानिक पदों पर रहे हैं, अगर वे सांविधानिक प्रक्रिया को नहीं समझते हैं तो उनकी समस्याओं का कोई इलाज नहीं है।
गैर-भाजपा सरकारों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि पहले कि सरकारें आतंकवादियों से समझौता करके प्रदेश के ढांचागत व्यवस्था को चौपट कर दिया था, लेकिन मोदी सरकार में बदलाव साफ दिख रहा है। यहां 34 साल बाद आशूरा का जुलूस निकल रहा है। श्रीनगर में रात के समय लोग खरीदारी करने के लिए निकल रहे हैं।