जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि देश को सशक्त बनाने में युवाओं का बड़ा योगदान होगा। आने वाले समय में हमें बहुत कुछ करके दुनिया को दिखाना है, इसमें युवाओं का एक अहम योगदान होगा। इस अमृत काल में शहीदों की शहादत से प्रेरणा लेकर युवा समाज में आदर्श स्थापित कर सकते हैं।
अमर शहीदों व महापुरुषों के दिखाए हुए मार्ग पर चलकर ही एक श्रेष्ठ समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने युवा पीढ़ी से शहीदों की जीवनी पढ़ने और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। वह रविवार को नंदग्राम के आदर्श नगर स्थित शहीद मेजर आशाराम त्यागी पार्क का उद्घाटन और मूर्ति का अनावरण करने आए थे।
सांसद और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने मेजर आशाराम त्यागी के संपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1965 के भारत पाक युद्ध में पाक के टैंकों की कब्रगाह बनाकर पाक के डोगराई गांव पर कब्जा करके आगे बढ़ गए थे। जाट रेजिमेंट के बहादुर घायल अफसर मेजर आशाराम त्यागी ने अपने साथियों से कहा था कि अगर मेरे घर से कोई आए तो मेरी मां को बता देना कि उनके बेटे ने पीठ पर नहीं सीने पर गोली खाई है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से राज्यसभा सदस्य अनिल अग्रवाल, राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप, एमएलसी अश्वनी त्यागी, पूर्व मंत्री मंत्री बालेश्वर त्यागी, निवर्तमान मेयर आशा शर्मा, मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी, साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा, गाजियाबाद विधायक अतुल गर्ग , कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के संरक्षक बाबा विद्यानंद त्यागी ने की। कार्यक्रम के संयोजक पूर्व पार्षद वीरेंद्र त्यागी थे। संचालन एडवोकेट विनोद त्यागी ने किया। कार्यक्रम के मौके पर भाजपा की जिला एवं महानगर इकाई के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे।
राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य आमने-सामने, न दिल मिले न हाथ
उपराज्यपाल के कार्यक्रम में हिस्सा लेने से पहले पूर्व पार्षद वीरेंद्र त्यागी के आवास पर पहुंचना था। उनके इंतजार में पहले से ही राज्यसभा सदस्य अनिल अग्रवाल बैठे थे।
इसी दौरान सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह भी आ गए। वह सीधे पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी के पास जाकर सोफे पर बैठ गए। इस दौरान दोनों में से किसी ने भी एक-दूसरे की तरफ नहीं देखा। वहीं मंच पर भी दोनों उपराज्यपाल के दाएं-बाएं मंचासीन रहे, लेकिन दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई। इस बात की चर्चा भी चलती रही कि सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
मेजर आशाराम त्यागी का परिचय
दो जनवरी 1939 को फतेहपुर मोदीनगर में जन्मे आशाराम त्यागी ने 20 वर्ष की उम्र में भारतीय सेना में भर्ती हुए। वर्ष 1965 में वह पाकिस्तान के खिलाफ युद्घ में शामिल हुए। पाकिस्तान ने भारत के डोगरई पर कब्जा कर लिया था। 21 सितंबर 1965 की रात भारतीय सेना डोगरई गांव को आजाद कराने गई। दोनों ओर से जमकर फायरिंग हुई।
मेजर आशाराम ने पाकिस्तानी मेजर पर गोली चलाकर संगीन से हमला किया। इस दौरान उनके सीने पर दो गोलियां लगी। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 25 सितंबर को वह शहीद हो गए थे। मरणोपरांत उन्हें वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। उनकी याद में प्रत्येक वर्ष मोदीनगर में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।