जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए प्रधानमंत्री के 34 मंत्र परीक्षा के तनाव को दूर करने के साथ बोर्ड परीक्षाओं में चिंता को दूर रखने में परीक्षा योद्धाओं की मदद करेंगे। शिक्षा केवल बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा के बारे में नहीं है। यह हमें जीवन और मनुष्यों के प्रति करुणा और आनंद विकसित करने के तरीके सिखाती है।
वर्तमान पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि उसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मिली है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी इस नीति को लागू करने के लिए जिम्मेदारी दिखाएं। उपराज्यपाल ने सोमवार को प्रधानमंत्री की प्रेरक पुस्तक एग्जाम वारियर्स का हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में विमोचन किया।
इस पथ प्रवर्तक बेस्टसेलिंग पुस्तक में प्रधानमंत्री ने परीक्षा के लिए एक ताजा दृष्टिकोण की रूपरेखा दी है, जिसमें सभी से उत्साह और उल्लास के साथ परीक्षा को एक त्योहार की तरह मनाने पर जोर दिया गया है। उपराज्यपाल ने जिलेभर के छात्रों और शिक्षकों के साथ आभासी बातचीत में कहा कि इस पुस्तक में दिए गए 34 मंत्र केवल पढ़ने और याद करने के लिए नहीं है, बल्कि हम सभी को उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करना चाहिए। यह पुस्तक युवा उम्मीदवारों की निरंतर साथी होनी चाहिए।
उपराज्यपाल ने 2018 से हर साल आयोजित होने वाले वार्षिक कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा के बारे में भी बात की। इसमें प्रधानमंत्री बोर्ड और प्रवेश लेने के बारे में सुझाव साझा करते हैं। यह एक आंदोलन है जो प्रधानमंत्री के छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को एक साथ लाने के प्रयासों से प्रेरित है। जम्मू कश्मीर में स्कूली शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण पहलों में ड्रापआउट अनुपात को कम करना, नामांकन में वृद्धि करना आदि है।
राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली हस्तियों से प्रेरणा लें बच्चे
उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा किसी भी छात्र के मानसिक और आध्यात्मिक विकास का माध्यम है। जीवनभर हम कुछ न कुठ सीखते रहते हैं और इस दिशा में देखा जाए तो परीक्षा मंजिल नहीं, मंच है। बच्चों को उन महान हस्तियों के बारे में भी सीखना और जानना चाहिए जिन्होंने देश के निर्माण और पोषण में योगदान दिया है। उन्होंने स्कूलों में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इस दौरान प्रधान सचिव स्कूल शिक्षा विभाग आलोक कुमार आदि मौजूद रहे।