पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोयबा में भर्ती किए जाने वाले युवाओं को तीन स्तर पर ट्रेनिंग दी जाती है। पाकिस्तान और पीओके (पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर) के अलग-अलग स्थानों पर होने वाली ट्रेनिंग में धार्मिक कट्टरता कूट-कूट कर भरी जाती है, ताकि वह अपने मिशन से कभी डिग न पाएं।
इसका जिक्र नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की ओर से उधमपुर हमले की चार्जशीट में किया गया है। इसका खुलासा पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नावेद ने जांच एजेंसी की पूछताछ में किया है।
इन शिविरों में चार पाकिस्तानी आतंकियों ने भाग लिया था, जिन्होंने पिछले साल जून में लाइन आफ कंट्रोल (एलओसी) पार कर जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया।
कई तरह के हथियार चलाने का दिया जाता है प्रशिक्षण
नावेद के अनुसार पहला कैंप ‘दौरा-ए-आम’ पाकिस्तान के खैबर पख्तुनखवा स्थित खुलहारी कैंप में हुआ। तीन सप्ताह के कैंप में आतंकियों में धार्मिक कट्टरता कूट-कूट कर भरी गई, ताकि इस्लाम के नाम पर वह किसी भी हद तक जाने को तैयार रहें।
इस कैंप में विशेषज्ञों की ओर से आतंकियों की बेसिक फिटनेस का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अगली ट्रेनिंग ‘दौरा-ए-खास’ पीओके के मुजफ्फराबाद स्थित स्वाई नाला के अक्स मश्कर कैंप में होती है।
जहां तीन से पांच माह तक की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां आटोमैटिक हथियारों समेत अन्य हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है।
आतंकी नावेद ने तीनों सेंटरों में ली थी ट्रेनिंग
प्रशिक्षकों को जब महसूस होता है कि आतंकी हथियार चलाने में पारंगत हो गया है तो उसे तीसरे कैंप ‘दौरा-ए-लश्कर’ के लिए भेजा जाता है।
यह कैंप भी स्वाई नाला के अक्स मश्कर शिविर में ही चलता है। यहां फील्ड क्राफ्ट एंड टैक्टिस का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें मैप रीडिंग, जीपीएस सिस्टम और वायरलेस रेडियो का उपयोग करना सिखाया जाता है।
जम्मू कश्मीर में घुसपैठ करने से पहले नावेद सहित अन्य लश्कर आतंकियों ने इन तीनों शिविरों में भाग लिया और वहां उन्हें ट्रेनिंग दी गई।