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लेह-लद्दाखः न्यायाधीश ने पूछा, कोर्ट में लद्दाख का सरकारी पक्ष कौन रखेगा

Thu, 21 Nov 2019 04:35 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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हाईकोर्ट में लेह और लद्दाख से संबंधित मामलों पर सरकार का पक्ष रखने वाला कोई सरकारी वकील नहीं है। इसकी वजह से कोर्ट में मामलों की जांच भी प्रभावित हो रही है। ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं। इसी तरह के एक मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

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जिस पर कोर्ट ने लद्दाख यूनियन टेरेटरी के मुख्य सचिव और सलाहकार को आदेश जारी कर पूछा है कि कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने के लिए किसे नियुक्त किया है या क्या व्यवस्था है पर स्थिति स्पष्ट करेंगे। जस्टिस अली मोहम्मद मागरे ने मंगलवार को हसीना बानो और अन्य की दायर याचिका पर यह आदेश दिया।

जज ने माना कि जब अपीलकर्ता ने रिट याचिका दायर की। तब प्रतिवादी पक्ष का प्रशासनिक नियंत्रण तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के अधीन था। अपीलकर्ता का राहत क्लेम लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल और लेह लद्दाख पालीटेक्निक कॉलेज के खिलाफ है।

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...लेकिन लद्दाख यूटी में न चीफ सेक्रेटरी, न सलाहकार

मंगलवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो सरकारी वकील रैस उद दिन गेनेई ने कोर्ट में कहा कि लद्दाख खित्ते से संबंधित मामलों का सरकारी पक्ष रखने के लिए किसे नियुक्त किया गया है। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन एक्ट में लद्दाख के सभी मामले लेफ्टिनेंट गवर्नर के अधीन हैं। जज ने कहा कि कोर्ट ऐसे बहुत से मामलों में दिक्कत महसूस कर रहा है।


हाईकोर्ट ने लद्दाख यूटी के चीफ सेक्रेटरी और सलाहकार को आदेश दिया है कि वह बताएं कि सरकारी पक्ष रखने वाले अधिवक्ता की नियुक्ति को क्या कदम उठाया। लेकिन अभी तक लद्दाख यूटी में न तो चीफ सेक्रेटरी हैं और न ही सलाहकार। उपराज्यपाल ही सब काम देख रहे हैं।

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