मंगलवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो सरकारी वकील रैस उद दिन गेनेई ने कोर्ट में कहा कि लद्दाख खित्ते से संबंधित मामलों का सरकारी पक्ष रखने के लिए किसे नियुक्त किया गया है। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन एक्ट में लद्दाख के सभी मामले लेफ्टिनेंट गवर्नर के अधीन हैं। जज ने कहा कि कोर्ट ऐसे बहुत से मामलों में दिक्कत महसूस कर रहा है।
हाईकोर्ट ने लद्दाख यूटी के चीफ सेक्रेटरी और सलाहकार को आदेश दिया है कि वह बताएं कि सरकारी पक्ष रखने वाले अधिवक्ता की नियुक्ति को क्या कदम उठाया। लेकिन अभी तक लद्दाख यूटी में न तो चीफ सेक्रेटरी हैं और न ही सलाहकार। उपराज्यपाल ही सब काम देख रहे हैं।