लेह। 11 साइकिल चालकों के एक दल ने दिल्ली के मैदानों से लेह की ऊंचाई पर स्थित पैंगोंग त्सो झील तक एक उल्लेखनीय यात्रा मंगलवार को पूरी की। दल में शामिल पांच महिलाओं और छह पुरुषों ने हिमालय के सबसे चुनौतीपूर्ण और विस्मयकारी भूभागों को साइकिल से पार किया।
भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में शुरू किया गया यह अभियान केवल सहनशक्ति की परीक्षा से कहीं अधिक था। यह साहस और स्मृति के प्रति एक मार्मिक श्रद्धांजलि बन गया। ये अभियान राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति राष्ट्रीय कृतज्ञता की एक जीवंत अभिव्यक्ति रहा। 10 नवंबर को अभियान अपने गंतव्य पर पहुंचा और त्रिशूल डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अरिंदम साहा ने कारू स्थित त्रिशूल युद्ध स्मारक पर औपचारिक रूप से ध्वजारोहण किया।
ऊंचे रेगिस्तानों, बर्फीले दर्रों और पतली हवा से होकर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए, साइकिल चालक अपने साथ तिरंगा और एकता, धैर्य और बलिदान का संदेश लेकर चल रहे थे।