जम्मू। लक्ष्मी विहार और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। पिछले साल आई बाढ़ के बाद मंत्री, विधायक समेत प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरा कर समाधान का भरोसा दिलाया था। दस माह बीतने के बाद भी कोई बदलाव नहीं आया है। मौजूदा हालात यह है कि श्मशानघाट से रिजार्ट पुल के बीच नाले की सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य अधूरा है।
लोगों का आरोप है कि तीन बार टेंडर जारी हुए लेकिन सबसे संवेदनशील हिस्से को छोड़कर अन्य स्थानों पर निर्माण करा दिया गया। इस वजह से बरसात में सैकड़ों परिवारों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। घरों को बचाने के लिए मजबूरन तीन-तीन फुट की दीवार करवानी पड़ी। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मानसून से पहले सुरक्षा दीवार का निर्माण और नाले के संरक्षण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।
300 घरों में घुसा था पानी
श्मशानघाट से कालिका कॉलोनी के आसपास रहने वाले 300 से अधिक घर जलमग्न हो गए थे लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए। इतना ही नहीं, पांच साल से श्मशानघाट से रिजार्ट पुल के बीच रहने वाले 70 से 80 परिवार जलभराव की समस्या झेल रहे हैं जिनकी सुध नहीं ली जा रही है। लोगों का आरोप है कि बाढ़ से पहले और बाद में नेताओं व मंत्रियों ने दौरा किया लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। इतना ही नहीं किसी प्रतिनिधि द्वारा कुछ प्रयास करके बजट पास कराया गया जो वोट बैंक का शिकार हो गया।
बस दावे ही किए थे...
लक्ष्मी विहार के विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि बाढ़ के समय बड़े दावे किए गए थे लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। मंजू गुप्ता के अनुसार नाले को लेकर बजट भी पास हुआ लेकिन निर्माण कार्य नहीं हुआ। संदीप धर बताते हैं कि जो कभी नहर थी वह अब नाले में तबदील हो चुकी है। संरक्षण और सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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