बहुचर्चित जगती विस्थापित हत्याकांड के आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को अलग रख हाईकोर्ट ने फिर से आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं। आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 302 की बजाय 304 पार्ट-2 के तहत आरोप तय होने पर सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जस्टिस जनक राज कोतवाल की अदालत ने पाया कि आदेश पास करने के बाद अभियोजन के तीन गवाहों के बयान ट्रायल कोर्ट ने रिकार्ड किए।
अदालत ने कहा कि अब चूंकि ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को अलग रखा गया है, इसलिए केस की तमाम कार्यवाही को रद्द किया जाता है। जस्टिस ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ताजा आरोप तय करने की कार्यवाही करे और दोनों पक्षों को सुनने के बाद नया आदेश जारी करे। कोर्ट यह भी सुनिश्चित करे कि आर्डर जारी करने में किसी भी परिस्थितियों में छह सप्ताह से ज्यादा समय न लगे।
पुलिस केस के अभनुसार चार अगस्त 2013 को अंकुश तालाशी ने नगरोटा थाने में लिखित शिकायत में कहा कि घटना के दिन वह अपने पिता तेज नाथ तालाशी और चाचा प्यारे लाल तालाशी के साथ शाम सात बजे जगती फ्लाई ओवर की ओर इवनिंग वाक पर जा रहे थे। इसी दौरान एक वाहन (जेएमयू-7778) ने उनका रास्ता रोका। उस वाहन में चार लोग सवार थे। इनमें से तीन, सुमित सिंह, नरेश कुमार शर्मा और गौरव प्रताप सिंह को वह पहचानते हैं।
वह एकाएक निकले और पुरानी दुश्मनी के कारण उनका अपहरण करने की कोशिश की। इसी दौरान उनके पिता ने शोर मचा दिया। हालांकि उनके पिता ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन हमलावरों ने उनके पिता को पकड़ लिया। सुमित सिंह ने धारदार हथियार से उनके पिता पर वार किया। उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए जीएमसी में भर्ती करवाया गया।
शिकायतकर्ता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 307, 364, 34 और आर्म्स एक्ट 4/25 के तहत मामला दर्ज किया। इलाज के दौरान तेज नाथ की मौत हो गई। पुलिस ने केस की धारा 307 को 302 में तब्दील कर दिया।
जेएनएफ