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विस में पारित सिविल लॉ एक्ट को चुनौती

Wed, 17 Sep 2014 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर सिविल लॉ (स्पेशल प्रोविजन एक्ट) 2014 की संवैधानिक मान्यता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर ने अगली सुनवाई से पहले अपना पक्ष रखने को कहा है, अन्यथा बिना सरकारी जवाब के केस को सुना जाएगा।
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रियासती विधानसभा ने इस एक्ट को पारित किया है। याचिकाकर्ता जतपिंदर सिंह का कहना है कि एक्ट मुख्य रूप से बहस पर तैयार किया गया है, जबकि अदालत के किसी आदेश, निर्णय या निर्देश के आधार पर नहीं बनाया गया है। विधानसभा अपील करने वाली अथारिटी के रूप में काम कर रही है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उदाहरण भी दिया। कटड़ा में होने वाले अवैध निर्माण के संबंध में रियासी के डीसी के खिलाफ अदालत की अवमानना की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने प्रतिवादी को मामले की अगली सुनवाई पर अपना जवाब देने को कहा।
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खंडपीठ ने कहा कि डीसी इन दिनों रियासत में आई आपदा में राहत कार्यों में जुटे हैं, इसलिए प्रतिवादी इस पर अपना जवाब दे।
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