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Target Killing: चेहरे पर गम और आंखों में आक्रोश के साथ पूरण का अंतिम संस्कार, पाकिस्तान के खिलाफ लगे नारे

Mon, 17 Oct 2022 02:10 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/दोमाना

सार

भट की शनिवार को दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के चौधरी गुंड इलाके में अपने पुश्तैनी घर के बाहर आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। वह अपने सेब के बागों की देखभाल करने के लिए वहां गए थे। शनिवार देर रात भट का पार्थिव शरीर जम्मू के मुट्ठी स्थित आवास पर पहुंच गया था।
 
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कश्मीर पंडित पूरन कृष्ण भट के पार्थिव शव को ले जाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कश्मीर घाटी में आतंकियों की टारगेट किलिंग का शिकार बने कश्मीरी पंडित पूरण कृष्ण भट का रविवार को जम्मू में गम और आक्रोश के माहौल के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया।  उनके बड़े भाई के बेटे शुभम भट ने मुखाग्नि दी। इस दौरान लोगों के चेहरे पर गम और आंखों में आतंकवाद के खिलाफ भारी आक्रोश दिखा। लोगों ने पाकिस्तान और आतंकवाद मुर्दाबाद, जिस कश्मीर को खून से सींचा वो हमारा है, शहीद पूरण कृष्ण भट अमर रहे के नारे लगाए।

पुश्तैनी घर के बाहर आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी

भट की शनिवार को दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के चौधरी गुंड इलाके में अपने पुश्तैनी घर के बाहर आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। वह अपने सेब के बागों की देखभाल करने के लिए वहां गए थे। शनिवार देर रात भट का पार्थिव शरीर जम्मू के मुट्ठी स्थित आवास पर पहुंच गया था।

आवास पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए

रात से ही उनके आवास पर बड़ी संख्या में रिश्तेदार और कश्मीरी समुदाय के लोग पहुंच गए थे। उनके आवास पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भट का पार्थिव शरीर  रविवार की सुबह बनतालाब स्थित श्मशान घाट ले जाने के लिए तैयारी की जा रही थी उस समय लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा नजर आ रहा था।

पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार नारेबाजी

हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। भट का पार्थिव शरीर जब श्मशान घाटा के लिए रवाना हुआ तो पत्नी बदहवास की हो गई, दोनो बच्चों श्रिया (बेटी) और शानू (बेटा) को समझ में नहीं आ रहा था वह कैसे प्रतिक्रिया दीं।

  • शव श्मशान घाट पर पहुंचते ही भट्ट के कई परिजनों  के सब्र का बांध टूट गया। श्रिया को अपने छोटे भाई के साथ अपने पिता को एकटक देखती नजर आई। अंत में उसने पिता के शरीर को चूम कर अलविदा कहा। इस अवसर पर मंडलायुक्त जम्मू रमेश कुमार, एडीजी पुलिस मुकेश सिंह, डीसी अवनी लवासा, एसएसपी व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित राजनीतिक दलों के लोग भी श्मशान घाट पहुंचे थे। 

अधिकारियों को करना पड़ा आक्रोश का सामना

मंडलायुक्त समेत अन्य अधिकारियों के श्मशान घाट पर पहुंचते ही लोगों का आक्रोश भड़क गया। लोगों ने सुरक्षा स्थिति सामान्य होने तक घाटी के बाहर हिंदू कर्मचारियों को तत्काल स्थानांतरित करने के अलावा, मृतक की पत्नी को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और सरकारी नौकरी सहित परिवार को पर्याप्त मुआवजा देने की भी मांग की। इसके साथ ही घाटी में लक्षित हत्याओं को रोकने में कथित विफलता के लिए शोक करने वालों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

सुरक्षा के सरकार के दावे झूठे

पूरण के  एक रिश्तेदार ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुरक्षा स्थिति में सुधार के बारे में सरकार के दावे झूठे साबित हुए। एक और कश्मीरी पंडित आतंकियों की  की गोलियों का शिकार बन गया। वह पिछले दो वर्षों में 18वें अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य हैं, जिनकी घाटी में हत्या की गई है।

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उन्होंने कहा कि जहां भट की हत्या की गई थी, उसके पास एक पुलिस चौकी और एक सैन्य शिविर स्थित है, जो दर्शाता है कि घाटी में सुरक्षा की स्थिति 1990 के दशक की शुरुआत में सीमित हो गई है। मृतक के शव के साथ शोपियां से आए भट के एक अन्य रिश्तेदार ने कहा कि उन्हें लगता है कि आतंकवाद के विस्फोट के बाद घाटी नहीं छोड़ना उनकी सबसे बड़ी गलती थी।

 कश्मीर में शूटिंग होना स्थिति सामान्य होने के संकेत नहीं

पनुन कश्मीर के संयोजक अग्निशेखर ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की लगातार हत्याओं के मद्देनजर कश्मीर में सामान्य स्थिति के सभी दावे विफल हो गए हैं। उन्होंने कहा, पर्यटकों का आना और फिल्मों की शूटिंग सामान्य स्थिति के कोई संकेत नहीं हैं..असली सामान्य स्थिति तब होगी जब हम (कश्मीरी पंडित) बिना किसी डर के वहां स्वतंत्र रूप से घूमने और फिर से बसने में सक्षम होंगे।

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