आज से आरंभ हो रहे राज्य विधानसभा सत्र के काफी हंगामेदार होने की आशंका है। उमर सरकार का यह अंतिम सत्र होगा। वर्तमान हालात को देखते हुए सभी दल सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे। गठबंधन में शामिल कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस में खाई भी गहरी हो गई है। सदन के भीतर दोनों दलों में समन्वय की कम ही संभावना दिखाई देने के आसार हैं।
सोमवार से शनिवार तक चलने वाले इस आखिरी सत्र में 25, 26, 29 और 30 अगस्त के दिन गर्वनमेंट बिजनेस के लिए रखे गये हैं। प्राइवेट सदस्यों के प्रस्ताव 27 अगस्त को पेश होंगे, जबकि प्राइवेट मेंबरों के बिलों के लिए 28 अगस्त का दिन तय किया गया है।
चुनाव के नजदीक होने से सभी दलों के सदस्य सरकार को घेरने के प्रयास में रहेंगे, जबकि सरकार छह वर्षों के दौरान हासिल उपलब्धियों का बखान करेगी। सदन के भीतर शायद पहली बार ऐसा होगा कि कोई भी किसी के साथ नहीं होगा।
नेकां और कांग्रेस के बीच दूरियां बढ़ जाने से किसी भी मुद्दे पर दोनों में सहमति की उम्मीद कम नजर आ रही है।
जम्मू के साथ लगती भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तान द्वारा की जा रही भारी गोलाबारी को भाजपा, पैंथर्स पार्टी तथा दूसरे दल उठाएंगे, जबकि कांग्रेस भी इस मुददे को भुनाने के प्रयास में रहेगी।
केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण भाजपा भी सदस्यों के निशाने पर रहेगी। अलगाववादी नेताओं से पाकिस्तान के उच्चायुक्त की बैठक के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की टूट चुकी वार्ता का मुद्दा भी सदन मेंगरमाने की उम्मीद है।