स्थानीय केंद्रीय जेल में बीते लगभग आठ माह से बंद एक कैदी की उपचार के दौरान मौत हो गई। गुरुराम दास कालोनी बटाला निवासी प्रभजोत सिंह कुछ समय से बीमार चल रहा था। उसके परिजनों ने आरोप लगाया है कि मौत का कारण जेल प्रशासन की लापरवाही है।
मृतक 1983-84 के दौर में आतंकी के तौर पर चिह्नित किया गया था। बाद में कोर्ट की ओर से उसे भगोड़ा भी घोषित किया गया। इस बीच करीब आठ माह पहले उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। प्रभजोत सिंह के बीमार होने पर जेल प्रशासन ने उसे पहले गुरदासपुर अस्पताल भेजा था।
बाद में गुरदासपुर अस्पताल के डाक्टरों ने उसे अमृतसर अस्पताल रेफर कर दिया। इस बीच गंभीर हालत में अस्पताल से पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने प्रभजोत के इलाज में देरी की।
यदि समय रहते माकूल उपचार होता तो कैदी की जान बच सकती थी। मृतक की पत्नी सर्वजीत कौर तथा जीजा सतवंत सिंह काहलो ने बताया कि वह जब गुरु नानक स्कूल बटाला में पढ़ता था, तब आतंकवाद दौर के चलते साल 1983-84 में पुलिस ने इसे आतंकी के तौर पर पकड़ा था।
बाद में अदालती कार्रवाई के दौरान ही प्रभजोत सिंह अमेरिका चला गया। वहां 20 वर्ष रहने के उपरांत जब लगभग आठ माह पूर्व वह वापस भारत लौटा तो पुलिस ने उसे दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। सतवंत सिंह काहलो ने बताया कि जेल में प्रभजोत सिंह को छाती में दर्द होने की शिकायत हुई थी।
जिस पर उन्होंने जेल प्रशासन से प्रभजोत सिंह का उपचार करवाने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने इलाज में दिलचस्पी नहीं दिखाई। 19 अगस्त को कोर्ट से आदेश पर उन्होंने प्रभजोत सिंह का उपचार करवाना चाहा, लेकिन तब भी जेल प्रशासन ने प्रभजोत सिंह को दो दिन बाद उपचार के लिए भेजा।