जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भूस्खलन हो गया, जिससे पिठ्ठू पालकी काउंटर पर सात श्रद्धालु घायल हो गए। इनमें से तीन को गंभीर स्थिति में नारायणा अस्पताल भेजा गया है, जबकि बाकी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। फिलहाल यात्रा को दोपहर 1 बजे तक के लिए रोका गया है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि यात्रा की योजना बनाने से पहले मौसम और स्थिति की जानकारी जरूर लें। अभी तक किसी की मृत्यु की सूचना नहीं है।
श्राइन बोर्ड के सीईओ सचिन शर्मा ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चल रहा है और ट्रैक से मलबा हटाने का काम भी किया जा रहा है ताकि यात्रा जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से बहाल हो सके।
वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए भूस्खलन को लेकर भाजपा विधायक बलदेव राज ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ जैसी ही एक प्राकृतिक आपदा का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि अगर वहां शेड न बना होता, तो हादसा और बड़ा हो सकता था। सबसे पहले स्थानीय घोड़ा संचालकों ने राहत कार्य शुरू किया, जिसके बाद पुलिस और श्राइन बोर्ड के अधिकारी मौके पर पहुंचे। फिलहाल 1-2 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हैं और श्राइन बोर्ड ने वैकल्पिक मार्ग खोलकर यात्रा को जारी रखा है।
बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) रषपाल बांगोत्रा ने बताया कि अब तक किसी की मौत की सूचना नहीं है। 6 घायल श्रद्धालु उनके पास लाए गए, जिनमें से 4 को हड्डियों से जुड़ी चोटें थीं और उन्हें नारायणा अस्पताल भेजा गया है। घटना की जानकारी सुबह करीब 9 बजे मिली थी और 15 मिनट के अंदर घायलों को इलाज के लिए लाया गया।
घायल हुए श्रद्धालुओं को इलाज के लिए काटड़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया है। उनकी स्थिति की निगरानी की जा रही है और प्राथमिक इलाज जारी है।
भूस्खलन के दौरान एक घायल श्रद्धालु के परिजन ने बताया कि वे अमरनाथ यात्रा से लौटकर वैष्णो देवी दर्शन के लिए आए थे। सुबह जब वे घोड़े की बुकिंग कर रहे थे, तभी अचानक पत्थर गिरने लगे और फिर भूस्खलन हुआ, जिससे भगदड़ मच गई। इस हादसे में उनकी मां का पैर फ्रैक्चर हो गया और कई श्रद्धालु मलबे के नीचे दब गए।