एलजी ने कहा कि आर्य महासम्मेलन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और महर्षि दयानंद के आदर्शों से प्रेरित करने का माध्यम बनेगा। उपराज्यपाल ने कहा, वैदिक ज्ञान के पुनः प्रचार-प्रसार की जरूरत है। इसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल हमारी प्राचीन सभ्यता के मूल्यों और आदर्शों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएगा, बल्कि विज्ञान, कला, मानविकी और गणित के क्षेत्र में हमारी समृद्ध विरासत से भी परिचय कराएगा।
महर्षि दयानंद के विचारों को आगे बढ़ाने वालों को किया सम्मानितउपराज्यपाल ने आर्य समाज से अपील की कि वह शांति, एकता और मानवता के कल्याण का संदेश समाज के हर कोने तक पहुंचाए। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद के विचार आज भी दुनिया में स्थायी शांति और स्थिरता ला सकते हैं।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में महर्षि दयानंद के विचारों को आगे बढ़ाने वालों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में स्कास्ट के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी, आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नरेंद्र त्रेहन, मप्र आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष प्रकाश आर्य, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के महासचिव विनय आर्य, स्वामी देवरत्न सरस्वती, आचार्य नंदिता शास्त्री आदि उपस्थित रहे।