सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही रिंग रोड परियोजना का पेच हट गया है। जम्मू शहर विस्तारीकरण से लेकर सीमावर्ती इलाकों की चौकियों को बड़ी रोड कनेक्टिविटी देने के लिए अहम रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू होने जा रहा है।
इसके लिए अगले एक महीने में बाकायदा जमीनी स्तर पर कवायद शुरू हो सकती है। अगले चार साल में 57 किलोमीटर लंबी रिंग रोड मूर्तरूप ले सकती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सूत्रों के अनुसार केंद्रीय सरकार द्वारा मंजूर की गई रिंग रोड का काम भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग पर प्रस्तावित खर्च में भागीदारी को लेकर मामला अटका था।
अथॉरिटी के जम्मू परियोजना निदेशक आरपी सिंह ने पुष्टि करते हुए बताया कि रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधित शुरुआती चरण के अन्य खर्च का पच्चीस फीसदी राज्य सरकार वहन करेगी। भूमि अधिग्रहण के लिए अनुमानित एक वर्ष जबकि सड़क निर्माण में तीन वर्ष का अनुमानित समय लगेगा।
लगभग तेरह सौ करोड़ की लागत से प्रस्तावित रिंग रोड जम्मू के शहरी जीवन के विकास और भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सामरिक महत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना है।
रिंग रोड राया मोड़ से शुरू होगी जो बिश्नाह, आरएस पुरा से सटे इलाकों से होकर बड़ी तवी, निक्की तवी, अखनूर से सटे इलाकों से होकर नगरोटा के नजदीक जगती तक प्रस्तावित है। दोनों तरफ से यह सड़क नेशनल हाईवे 1 ए से जुड़ेगी।