आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में ग्लेशियर से बनी झीलों की निगरानी के लिए सरकार ने बीते साल प्रमुख सचिव गृह की अगुवाई में फोकस्ड ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्ल्ड (एफजीएलओएफ) मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया था। इसका काम ग्लेशियरों और इससे बनने वाली झीलों की स्थिति की समीक्षा करना और उनसे जुड़े खतरे को कम करने के लिए उपाय सुझाना था।
जिला असुरक्षित झीलों की संख्या नाम
किश्तवाड़ 04 मुंदिकसर, हंगू, पतला पानी और एक अनाम झील
राजोरी 04 हांडूसर, भगसर, नंदनसर, कदासरपुंछ 01 अनाम झील
गांदरबल 10 लालगुल सार, गंगबल झील, गाद सार, कृष्णसार, विशन सार, रॉयल सर, यमसार, डोडसार, सोरस और एक अनाम झीलअनंतनाग 06 शेषनाग, मरसार, टरसार, सोरासर, बोडसार, सोनसार
बड़गाम 02 पमसार, बंदसारकुलगाम 01 कौसरनाग
बांदीपोरा 01 अनाम झील
17 पैरामीटर्स पर करते हैं असुरक्षित घोषित
झीलों के आकार, द्रव्यमान, तापमान, लोकेशन, मूवमेंट जोन जैसे कुल 17 पैरामीटर्स के आधार पर किसी भी झील को असुरक्षित घोषित किया जाता है। कई बार ग्लेशियर टूटकर झील में गिरते हैं। इससे आकार में बढ़ोतरी हो जाती है। ऐसे में अगर लगातार बारिश रहे तो फ्लैश फ्लड का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
अमरनाथ यात्रा का अहम पड़ाव है शेषनाग
प्रदेश में हर साल अमरनाथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। अनंतनाग जिले में स्थित शेषनाग अमरनाथ यात्रा का अहम पड़ाव है। शेषनाग झील को भी असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में झील को लेकर खतरा और बढ़ जाता है।