एसआई शुभम सेठ का पार्थिव शरीर सोमवार की रात को घर पहुंचा तो उनके स्वजन बेसुध हो गए।
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू नरवाल के रहने वाले सब-इंस्पेक्टर शुभम सेठ की सड़क हादसे में हुई मौत किसी को पच नहीं पा रही। घर के बाहर मौजूद रिश्तेदार से बात करने पर पता चला कि शुभम अभी बीते बुधवार को ही घर से श्रीनगर गए थे। 2019 बैच के शुभम छह वर्ष से श्रीनगर में थे। अब उनका तबादला जम्मू पुलिस मुख्यालय में हो चुका था। कुछ समय बाद ही वे रिलीव होने वाले थे। परिवार इससे खुश था कि इतने वर्षों बाद सब साथ मिलकर रहेंगे। लेकिन शुभम की मौत ने सारी उम्मीदें खत्म कर दीं।
एसआई शुभम सेठ का पार्थिव शरीर सोमवार की रात को घर पहुंचा तो उनके स्वजन बेसुध हो गए।
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साइबर कमांडो विंग में हुआ था चयन, बता दें कि देशभर में संबंधित राज्यों की पुलिस के अधीन साइबर कमांडो विंग का गठन हो रहा है। इसमें रुचि रखने वालों से आवेदन मांगे गए थे। शुभम ने भी इसमें आवेदन किया था और उनका परीक्षण के बाद चयन हो गया था। जम्मू तबादला होने पर वे इसका हिस्सा बनने वाले थे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
ढाबा चलाते हैं पिता, बेटे के पुलिस अधिकारी बनने से थे गदगद
शुभम के पिता भगवान सरूप सेत नरवाल में ही शर्मा के नाम से वैष्णो ढाबा चलाते हैं। पिता ने कहा, बेटा जब पुलिस अधिकारी बना तो खुशी का ठिकाना नहीं था। हम गदगद थे। कड़ी मेहनत करके बेटे को पढ़ाया था। वह बहुत इंटेलिजेंट था। तकनीक में रुचि रखता था। इसलिए उसने साइबर कमांडो विंग में भी आवेदन कर रखा था। अभी कल ही तो उससे बात हुई थी। यकीन नहीं हो रहा कि वह अब इस दुनिया में नहीं है। मेरी तो कमर ही टूट गई है।
एसआई शुभम सेठ का पार्थिव शरीर नरवाल लेकर पहुंचे अधिकारी।
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एसआई शुभम सेठ का पार्थिव शरीर सोमवार की रात को घर पहुंचा तो उनके स्वजन बेसुध हो गए।
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ड्यूटी पर गए और लौटकर ना आए... बहन को राखी बांधने का वादा अधूरा रह गया
इस साल की राखी, सब-इंस्पेक्टर सचिन वर्मा की बहन के लिए एक वादा थी, जो अब कभी पूरा नहीं होगा। अमरनाथ यात्रा की ड्यूटी पर तैनात होने की वजह से, सचिन इस साल अपनी बहन मुस्कान से राखी नहीं बंधवा पाए थे। रक्षाबंधन पर कहा था कि वह नहीं पा रहे लेकिन ड्यूटी खत्म होने के बाद वह सबसे पहले घर आकर बहन से मिलेंगे, लेकिन सड़क हादसे ने सारी खुशियां छीन ली। इस खबर ने न केवल उनके परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि पूरे विजयपुर में शोक की लहर दौड़ गई है।
इस दुख की घड़ी में विजयपुर के विधायक चंद्र प्रकाश गंगा सहित कई नेता और गणमान्य लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे हैं। उनके साथी और स्थानीय लोग इस हादसे की गहन जांच की मांग कर रहे हैं।
इकलौते बेटा और परिवार के सहारा थे सचिनसचिन अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और परिवार का एकमात्र सहारा थे। उनके पीछे माता-पिता, पत्नी विशाली वर्मा और एक साल के दो मासूम बच्चे, अथर्व और श्रुति, हैं। जब से उनके निधन की खबर घर पहुंची है, तब से घर में मातम छाया हुआ है। उनके पिता सुखदेव वर्मा ने रोते हुए बताया कि उनका बेटा बहुत होनहार था और हमेशा सबकी मदद के लिए आगे रहता था।