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अस्पतालों में खून के लिए दूसरों का सहारा

Sat, 13 Jun 2015 08:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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विश्वभर में रविवार को भले ही विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन राज्य के अस्पतालों में ब्लड बैंकों को विकसित करने को लेकर अभी काफी कुछ करना बाकी है। शहर के अस्पतालों में ही कई बिना ब्लड बैंक के स्टोरेज सुविधा पर ही चल रहे हैं। इन स्टोरेज में कुछ यूनिट खून ही उपलब्ध रहता है। ऐसे अस्पतालों में मरीजों को खून के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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इन अस्पतालों में गायनी सहित अन्य दूसरी सर्जरी हो रही हैं। एम्स की तर्ज पर रेशमघर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नेफरोलाजी, यूरोलाजी, कार्डियोलाजी, सीटीवीएस सहित कई महत्वपूर्ण यूनिट काम कर रहे हैं। यहां विभिन्न यूनिटों की रोजाना कई सर्जरी हो रही हैं। डायलेसिस में भी मरीजों को नियमित खून की जरूरत पड़ती है, लेकिन अभी तक अस्पताल में ब्लड बैंक खोलने के लिए कुछ खास नहीं हो पाया है।

अस्पताल में ब्लड स्टोरेज सेंटर में कुछ यूनिट खून ही रिजर्व रहता है। इसमें अधिकांश मामलों में तीमारदारों को जीएमसी या एसएमजीएस अस्पताल से खून लाना पड़ता है। यही हाल शहर के दूसरे बड़े अस्पताल सरवाल का है। यहां भी गायनी सहित अन्य कई सर्जरी हो रही हैं, लेकिन खुद का ब्लड बैंक न होने के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को खून के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
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इस प्रक्रिया में तीमारदारों को दूसरी जगह से खून लाने में काफी दिक्कत होती है। कई बार जागरूकता के अभाव में देरी होने के कारण तीमारदारों के पास लिया गया खून बेकार हो जाता है। यह परेशानी एक जगह से दूसरी जगह पर जाने और आने में होती है। इन अस्पतालों में ब्लड बैंक के लिए कई बार घोषणाएं हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें खोलने के लिए अभी किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई है।
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