फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

#ladengecoronase: कोरोना मरीजों को मुफ्त खाना पहुंचा रहे दंपती, जरूरतमंदों की भी कर रहे मदद

Wed, 05 May 2021 02:33 PM IST
करिश्मा चिब अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर

सार

रईस अहमद और पत्नी निदा रईस ने श्रीनगर में मरीजों के लिए फूड फॉर कश्मीर मुहिम चलाई।
विज्ञापन
कोरोना मरीजों को मुफ्त खाना पहुंचा रहे दंपती - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कश्मीर में कोरोना महामारी के बीच कई ऐसे लोग सामने आए हैं जिन्होंने मनावता के लिए मदद के हाथ बढ़ाए हैं। चाहे वो यहां के स्थानीय एनजीओ हों, स्थानीय स्वयं सेवक ग्रुप हों या फिर कोई और। हर कोई यह कोशिश कर रहा है कि वह इस महामारी में जरूरतमंदों की मदद कर सकें। ऐसे ही हैं श्रीनगर के युवा दंपती रईस अहमद और निदा रईस। यह श्रीनगर के अस्पतालों और घरों में कोरोना संक्रमित मरीजों को मुफ्त खाना पहुंचाकर उनकी मदद कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने फूड फॉर कश्मीर नाम की मुहिम शुरू की है।

विज्ञापन


रईस ने फरवरी 2020 में एक स्टार्टअप शुरू किया था, जिसे उन्होंने टिफिन आव (टिफिन आया) का नाम दिया था। इस स्टार्टअप को भी कोरोना की मार झेलनी पड़ी। रईस अहमद ने बताया कि फूड फॉर कश्मीर मुहिम अभी हाल ही में शुरू की गई है। यह आईडिया उन्हें तब आया जब उन्हें कुछ ऐसे लोगों की ओर से खाने के लिए कॉल रिसीव हुई जो जरूरतमंद थे। इसलिए उन्होंने मुफ्त खाना पहुंचाने की यह मुहिम शुरू की।

1500 से ज्यादा लोगों को अब तक पहुंचाया खाना
रईस ने कहा कि अब तक वह करीब 1500 से ज्यादा लोगों को खाना पहुंचा चुके हैं। रईस ने कहा कि वह श्रीनगर के सब अस्पतालों में मरीजों और उनके अटेंडेंट्स को और साथ ही घरों में भी कोरोना के मरीजों को खाना पहुंचा रहे हैं। रईस ने कहा कि इस मुहिम में कई लोग जुड़ रहे हैं, जो आर्थिक मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई मामले ऐसे भी हैं जहां पूरे के पूरे परिवार पॉजिटिव हैं ऐसे में हम उनसे पैसे नहीं लेते। लेकिन बाद में कुछ लोग आर्थिक मदद करते हैं।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पर पूर्व एमएलसी ने लगाए गंभीर आरोप, आज रंधावा पेश करेंगे सबूत
विज्ञापन


पत्नी निदा भी कांधे से कांधा मिलाकर चल रहीं
रईस की पत्नी निदा रईस भी इस कार्य में उनके साथ कांधे से कांधा मिलाकर मदद कर रही हैं। कई बार तो वह उनके साथ डिलीवरी के लिए भी जाती हैं। एक घटना के बारे में बताते हुए निदा ने कहा कि वह और उनके पति एक मरीज को खाना देने जा रहे थे कि अचानक उन्हें फोन आया भइया खाना देने नहीं आना, मरीज की मृत्यु हो गई है। इस घटना ने उन्हें हिला कर रख दिया। निदा ने बताया कि उनकी 7-8 बंदों की टीम है, लेकिन खाना पकाने से लेकर पहुंचाने तक पूरा एहतियात बरता जाता है। जो अस्पतालों में डिलीवरी करते हैं वो भी पूरी तरह से प्रोटोकॉल का पालन करते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें