एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि एलएसी के दोनों तरफ नो मैंस लैंड है। यानी यह जगह पूरी तरह से खाली है। 1962 से चीन इस नो मैंस लैंड को कब्जाने की कोशिश करता आ रहा है। चीन कुटिल है लेकिन इस बार उसने गलवां में कुटिलता की पराकाष्ठा दिखाई। फिर भी उसे पीपी-14 पर मुंह की खानी पड़ी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के 72 प्रोजेक्ट लगभग पूरे
वर्चुअल मीट में एक सवाल पर सिंह ने कहा कि अविभाजित जम्मू-कश्मीर में सामरिक महत्व की 72 परियोजनाओं का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। इसके रिमाइंडर देते-देते वह साल 2012 में रिटायर हो गए। साल 2014 में मोदी सरकार आने पर इन 72 परियोजनाओं को प्राथमिकता से लिया गया। वर्तमान में 70 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, जबकि दो सड़कों का केवल 70 किलोमीटर बनना शेष है।