लद्दाख में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे इस भूभाग तक पहुंचना कितना भी मुश्किल क्यों न हो, तुरतुक से पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र (पीओके) देखने सैलानी यहां खिंचे चले आते हैं। एक तरफ मौत की नदी कही जाने वाली श्योक बहती है तो दूसरी तरफ गगनचुंबी पथरीले पहाड़। इस दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाके में सैलानियों का इस साल भी तांता लग रहा है।
एलओसी के तुरतुक सेक्टर में थांग गांव से पर्यटक पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से को देखने पहुंचते हैं। लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल के अनुसार थांग गांव आम लोगों के लिए वर्जित क्षेत्र था। पर्यटकों के लिए खोलने के बाद से यहां हर साल देश भर से लोग पहुंच रहे हैं। केंद्र सरकार के प्रयासों से बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि तुरतुक, थांग, त्याकशी और चलुंखा गांवों को पाकिस्तान के साथ 1971 की जंग में वापस हासिल किया गया था।
रोचक है तुरतुक का इतिहास
भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद कबायली हमले में पाकिस्तान ने लद्दाख के तुरतुक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था, लेकिन 1971 की जंग के दौरान भारतीय सेना ने लगभग 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वापस हासिल कर लिया। इसमें तुरतुक, थांग, त्याकशी और चलुंखा गांव शामिल थे।