लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने बुधवार को प्रस्तावित 'इंट्रा-कंट्री रोड मार्च' रद्द कर दिया है। मंगलवार शाम को एक प्रेसवार्ता में एलएबी नेताओं और सोनम वांगचुक ने इस बात की पुष्टि की। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों को यह कहकर भयभीत किया जा रहा है कि अगर मार्च निकाला गया तो उन्हें धारा 144 लगाने व इंटरनेट बंद करना पड़ेगा, जिससे पर्यटन व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रशासन विभिन्न हथकंडे अपनाकर लोगों को डराने की कोशिश कर रहा है। चूंकि लद्दाख चीन और पाकिस्तान की सीमा से लगा एक संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए हम कानून और व्यवस्था के संबंध में सरकार की आशंका को समझ सकते हैं और यही संभावित कारण है कि सरकार ने ‘पशमीना मार्च’ से पहले सख्त प्रतिबंध लगाए।
वांगचुक ने आगे कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर लोगों की आशंका के चलते वे प्रस्तावित मार्च को रद्द करते हैं। हम नहीं चाहते कि प्रशासन के द्वारा निषेधाज्ञा लगाने से लद्दाख के पर्यटन उद्योग का नुकसान हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि लद्दाख के लोगों के हक के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके लिए एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी।
बताते चलें कि एलएबी और वांगचुक ने घोषणा की थी कि चांग थांग में जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के लिए वो लद्दाख-हिमाचल प्रदेश सीमा पर स्थित स्कांगचू-थांग की ओर 17 अप्रैल को ''इंट्रा-कंट्री रोड मार्च'' शुरू करेंगे। उनका कहना था कि इस रोड मार्च का उद्देश्य स्कांगचू-थांग में स्थानीय चरवाहों की शिकायतों को सुनना था, जो दशकों से इस क्षेत्र में मवेशी चरा रहे हैं और अब कथित तौर पर उद्योगपति द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद उन्हें भूमि छोड़ने के लिए कहा गया है।