लद्दाख के 12 फीसदी गांवों में जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक दशक में लेह न्यूट्रिशन प्रोजेक्ट (एलएनपी) ने जल संरक्षण परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। इसमें कृत्रिम ग्लेशियरों और जलाशयों का निर्माण शामिल है। हाल के वर्षों में संगठन ने अपनी कोशिशों को बेहतर बनाने के लिए नवीन तकनीकों और उपायों की ओर रुख किया है।
पिछले वर्ष एलएनपी ने एक सौर ऊर्जा संचालित जल उठाने की प्रणाली का परीक्षण किया। इसे कृत्रिम ग्लेशियर बनाने के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि, यह परियोजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। हार न मानते हुए टीम ने अपने दृष्टिकोण में सुधार किया और इस वर्ष एक नई तकनीक पेश की। इसमें पानी को पाइप के माध्यम से ऊंचाई तक उठाकर स्प्रे किया जाता है, जिससे यह प्राकृतिक रूप से जमकर आइस स्तूप का रूप ले लेता है।
यह नई प्रणाली तीन दिन पहले नांग गांव में स्थापित की गई। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सर्दी के मौसम में एक बड़ा आइस स्तूप बनाने की उम्मीद है। इस पहल का नेतृत्व करने वाले लोटस ग्यात्सन ने कहा, यह प्रयोगात्मक परियोजना ईवाई फाउंडेशन और सस्टेन प्लस द्वारा समर्थित है, जो क्षेत्र में जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास को दर्शाती है।
लद्दाख में विकसित आइस स्तूपा मौसमी जलाशय के रूप में कार्य करते हैं, जो सर्दियों में पानी को बर्फ के रूप में संग्रहीत करते हैं और गर्मियों में इसे धीरे-धीरे छोड़ते हैं, जिससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए स्थायी जल प्रबंधन की उम्मीद जगी है। जल संकट के कारण लद्दाख में आजीविका और कृषि चक्र खतरे में हैं। ऐसे समाधान अन्य शुष्क क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकते हैं, जो इसी प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।