पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर पैंगोंग झील पर सोमवार को दुनिया की सबसे ऊंची झील पर मैराथन का विश्व रिकॉर्ड बना। जम चुकी झील के ऊपर चार विदेशियों समेत 75 धावकों ने दुनिया की सबसे ऊंची फ्रोजन लेक मैराथन में दौड़ लगाई।
माइनस 20 डिग्री तापमान में दौड़ने वाले प्रतिभागियों ने कम से कम चार परतों में कपड़े पहन रखे थे। हर पांच किलोमीटर के फासले पर एनर्जी स्टेशन स्थापित किया गया था। स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में एंबुलेंस और गर्म पानी की व्यवस्था की गई थी।
पैंगोंग झील की समुद्रतल से ऊंचाई 13,862 फुट है। विश्व में इससे पहले भी जमीन हुई झील पर मैराथन का आयोजन हो चुका है, लेकिन समुद्रतल से ऊंचाई के मामले में पैंगोंग झील सबसे आगे रही। अत्यधिक ऊंचाई होने की वजह से यहां जोखिम भी बहुत था।
इसके लिए बाकायदा अध्ययन किया गया था। झील की सतह 14 से 16 इंच मोटी पाई गई, जिस पर छोटा ट्रक भी चलाया जा सकता था। इसके बावजूद एहतियात बरतते हुए धावकों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर क्रमवार मैराथन में शामिल किया गया। प्रतिभागी पिछले कई दिन से अनुकूलन प्रक्रिया की एसओपी के तहत अभ्यास कर रहे थे।