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Ladakh : जल्द खुलेगी लद्दाख डार्क स्काई सेंक्चुअरी, परदे में रहेगी घर की रोशनी, आंगन में उतरेंगे चांद-सितारे

Mon, 05 Dec 2022 02:14 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

लद्दाख के हनले में टेलीस्कोप स्थापित होते ही देश को पहली डार्क स्काई सेंक्चुअरी मिल जाएगी और लद्दाख का चंगथंग क्षेत्र खगोल पर्यटन का बड़ा केंद्र बन जाएगा। ऊंचे पठार की वजह से तिब्बत और लद्दाख को विश्व की छत कहा जाता है।
 
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Ladakh Dark Sky Sanctuary - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रात को घर की रोशनी मोटे परदे में कैद रहेगी और बाहर घुप अंधेरे में चांद सितारे जमीन पर उतरेंगे। जल्द ही यह नजारा लद्दाख में लेह जिले के हनले गांव में तैयार की जा रही देश की पहली डार्क स्काई सेंक्चुअरी में नजर आएगा।

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खगोल पर्यटन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत शक्तिशाली 18 टेलीस्कोप स्थापित होंगे, जिसके लिए निजी परिसर और सार्वजनिक स्थान तय हो गए हैं। टेलीस्कोप संचालन के लिए युवाओं को प्रशिक्षण का काम भी पूरा हो गया है।

टेलीस्कोप स्थापित होते ही देश को पहली डार्क स्काई सेंक्चुरी मिल जाएगी और लद्दाख का चंगथंग क्षेत्र खगोल पर्यटन का बड़ा केंद्र बन जाएगा। ऊंचे पठार की वजह से तिब्बत और लद्दाख को विश्व की छत कहा जाता है। इस छत से वैज्ञानिकों के साथ सैलानी भी तारों की दुनिया और चलती आकाशगंगा देख सकेंगे।
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चंगथंग क्षेत्र के हनले गांव की समुद्रतल से ऊंचाई 4500 मीटर है। यहां भारतीय ताराभौतिकी संस्थान की वेधशाला है, जिसे दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची वेधशाला माना जाता है। डार्क स्काई सेंक्चुरी परियोजना के लिए लद्दाख प्रशासन, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (भारतीय ताराभौतिकी संस्थान) के बीच इसी साल जून में त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और वन एवं पर्यावरण विभाग की क्लीयरेंस लेने के बाद काम शुरू किया गया। हनले वेधशाला के प्रभारी चीफ इंजीनियर दोरजे अंगचुक के अनुसार हनले के तीन छोटे गांवों के 24 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वे अब ज्यादा क्षमता वाले टेलीस्कोप को चला सकते हैं।

लद्दाख प्रशासन की ओर से 18 स्थानाें पर टेलीस्कोप लगाने के अलावा मोबाइल एवं स्थायी तारामंडल स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है। जिन जगहों पर टेलीस्कोप लगाए जाने हैं, उनके चयन और सीमांकन का काम पूरा हो चुका है। हनले के अलावा पुुंगुक गांव में एक बड़ा टेलीस्कोप भी लगाया जाएगा।

खगोल पर्यटन को बढ़ावा देने को खुलेंगे होम स्टे

हनले व आसपास के इलाकों में खगोल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे खोले जाएंगे। इसके लिए ग्रामीणों को परियोजना के फायदे बताए गए हैं। गांव के लोग भी अपने घराें में होम स्टे सेवाएं देने के लिए तैयार हो गए हैं। इससे पर्यटकों को लद्दाख के ग्रामीण इलाकों के जीवन को समझने और खगोल पर्यटन का रोमांच देखने को मिलेगा।

खगोल विज्ञान के लिए प्रदूषण है कृत्रिम रोशनी 

डार्क स्काई रिजर्व परियोजना में रात के समय बल्ब, ट्यूबलाइट जैसे कृत्रिम रोशनी के सभी स्रोतों को नियंत्रित किया जाएगा। खगोल पर्यटन के लिए रात की रोशनी प्रदूषण कहलाती है। हनले व आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगाें को रात की रोशनी परदे में रखने के उपाय बताए गए हैं।

घर के भीतर की रोशनी बाहर न आए, इसके लिए मोटे परदे लगाए जाएंगे। वाहनों की आवाजाही को भी रात के समय नियंत्रित किया जाएगा, क्योंकि अंधेरा जितना गहरा होगा, खगोल पर्यटन में उतना उजाला होगा।

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