Nimmu-Padam-Darcha Road
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नामग्याल सीट न मिलने से मुखर
मौजूदा सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर पार्टी के इस निर्णय के खिलाफ खासी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पार्टी की तरफ से उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया।
छठी अनुसूची को लेकर भाजपा को झेलना पड़ रहा विरोध
2014 और 2019 में लद्दाख लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा छठी अनुसूची के कार्यान्वयन की मांग को लेकर व्यापक विरोध के बाद यूटी में मुश्किल स्थिति में है। निवासियों और राजनीतिक संगठनों का एक वर्ग पारिस्थितिक और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में भूमि, भाषा और नौकरियों की रक्षा के लिए कानून की मांग कर रहा है।
वर्तमान में लद्दाख में दो स्वायत्त जिला परिषदें हैं जिनके पास आर्थिक विकास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, भूमि उपयोग, कराधान और स्थानीय शासन के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, स्थानीय निवासी अनुच्छेद 244 के तहत छठी अनुसूची पर जोर दे रहे हैं, जो स्वायत्त विकास परिषदों को जनजातीय आबादी की रक्षा और स्वायत्तता प्रदान करने के लिए भूमि, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कृषि पर कानून बनाने की अनुमति देता है। विधानसभा के साथ राज्य का दर्जा बहाल करने की भी मांग है।
लद्दाख सीट का इतिहास कैसा रहा है
1967 से अब तक हुए चुनाव में छह बार कांग्रेस, दो बार नेकां, तीन बार निर्दल तथा दो बार ही भाजपा जीती है। भाजपा यहां 2014 से जीत रही है, जबकि कांग्रेस ने आखिरी बार 1996 में यहां जीत हासिल की थी। 1998 व 1999 में नेकां को जीत मिली थी, लेकिन बाद के दो चुनाव 2004 व 2009 में निर्दलीय संसद तक पहुंचे थे।