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लेह हिंसा की जांच : जनता से हलफनामों के जरिए समर्थित बयान पेश करने का अनुरोध

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संवाद न्यूज एजेंसी
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लेह। लेह हिंसा की न्यायिक जांच में आम जनता से अनुरोध किया गया है कि वे इस मामले के तथ्यों का विवरण देते हुए हलफनामों द्वारा समर्थित बयान प्रस्तुत करें। प्रत्येक प्रस्तुतीकरण में जहां तक संभव हो मूल प्रतियों या सत्य प्रतियों के साथ प्रासंगिक दस्तावेजों की एक सूची शामिल होनी चाहिए।
यदि प्रस्तुतीकरण कर्ता के पास कुछ दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो उन्हें उन दस्तावेजों को रखने वालों के नाम और पते प्रदान करने होंगे। यह सूचना रविवार को लद्दाख जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि बयान और सहायक सामग्री चार सप्ताह के भीतर यानी 28 नवंबर 2025 तक एडीआर सेंटर न्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स, मेलोंगथांग, लेह स्थित जांच आयोग के कार्यालय में जमा कराई जानी चाहिए।
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बता दें कि केंद्र सरकार ने 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। इस घटना में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति के कारण पुलिस कार्रवाई की गई थी जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई थी। गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख मामलों के विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना (सं. 12011/09/2025-एल तिथि 17 अक्तूबर 2025) के अनुसार यह जांच भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति बीएस चौहान को सौंपी गई।
आयोग लेह शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करने वाली परिस्थितियां, प्रतिक्रिया में की गई पुलिस कार्रवाई की प्रकृति और आचरण और घटना के दौरान चार नागरिकों की मृत्यु की जांच कर रहा है। जांच की कार्यवाही आधिकारिक तौर पर 27 अक्तूबर को शुरू हुई। न्यायमूर्ति डॉ. बीएस चौहान के नेतृत्व में जारी एक सार्वजनिक नोटिस में जांच आयोग ने घटना से संबंधित जानकारी या साक्ष्य रखने वाले सभी व्यक्तियों को आगे आकर अपने बयान दर्ज कराने के लिए आमंत्रित किया है।
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न्यायिक जांच से उन घटनाओं की शृंखला पर प्रकाश पड़ने की उम्मीद है जिनके कारण लेह में हिंसा की घटनाएं बढ़ीं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव दिए जाएंगे।
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