जम्मू-कश्मीर से अलग होने वाले केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख ने एक साल में ही स्कूली शिक्षा में देशभर में सबसे अधिक सुधार किया है। एक साल पहले तक प्रदेशों की प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक रिपोर्ट (परफार्मेंस ग्रेडिंग रिपोर्ट) में सबसे निचले स्तर ( 10 वां लेवल) पर रहने वाले लद्दाख को 2020-21 में बेस्ट परफारमेंस का दर्जा मिला है।
चंडीगढ़, पंजाब, केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश ने विभिन्न मानकों को पूरा करके बेहतर प्रदर्शन के चलते पहली बार लेवल-दो हासिल किया है। खास बात यह है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में लगभग 14.9 लाख स्कूल, 95 लाख शिक्षक और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लगभग 26.5 करोड़ छात्रों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली बन गई है।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने वीरवार को राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों का वर्ष 2020-21 का प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक (पीजीआई) जारी किया है। यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्कूली शिक्षा प्रणाली के साक्ष्य आधारित व्यापक विश्लेषण का एक विशिष्ट सूचकांक है। इससे पहले स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए पीजीआई रिपोर्ट जारी की है।
गुजरात, राजस्थान व आंध्र प्रदेश उच्चतम स्तर हासिल करने वाले नए राज्य:
कुल सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बेहतर प्रदर्शन के चलते लेवल-2 का दर्जा मिला है। इसमें केरल,पंजाब,चंडीगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश हैं। इन राज्यों ने वर्ष 2020-21 में लेवन -2 (स्कोर 901-950 के बीच) हासिल किया है। जबकि वर्ष 2017-18 में इस स्तर में अभी तक किसी भी राज्य या यूटी इसमें शामिल नहीं हो पाया था। अच्छी बात यह है कि निचले तीन लेवल के पायदान पर कोई भी राज्य नहीं है।
शिक्षा में सुधार के कारण लद्दाख का नाम सबसे ऊपर
पिछले सालों तक स्कूली शिक्षा में सबसे खराब प्रदर्शन वाले संघ शासित प्रदेश लद्दाख अब दूसरे राज्यों व संघ शासित प्रदेशों के लिए एक मिसाल बन गया है। लद्दाख ने वर्ष 2020-21 में पीजीआई रिपोर्ट में लेवल 8 से सीधे लेवल चौथा लेवल हासिल किया है। इस कारण बेस्ट परफार्मेंस का दर्जा भी मिला है। लद्दाख ने वर्ष 2019-20 की तुलना में वर्ष 2020-21 में अपने अंकों में 299 अंकों का सुधार किया है, जो एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक या बड़ा सुधार है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का ड्रापआउट कम हुआ
इस पीजीआई के मुताबिक, नई शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों को लागू करने के तहत 2030 तक ड्रापआउट करने की तैयारी काम कर रही है। वर्ष 2020-21 की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, यूपी, राजस्थान, लद्दाख, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक, ओड़िसा, छत्तीसगढ़, तेलगांना, नगालैंड, गुजरात, झारखंड, अंडेमान-निकोबार, तमिलनाडु में ड्रापआउट रेट में सुधार हुआ है। वहीं, हरियाणा, पंजाब, असम, केरल, महाराष्ट्र, सिक्किम में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। जबकि हिमाचल, उत्तराखंड, चंडीगढ़, त्रिपुरा, मिजोरम, पुडूचेरी, मेघालय, लक्षद्वीप, मणिपुर, गोवा में ड्रापआउट बढ़ा है।