सोनम वांगचुक ने भाजपा पर छठी अनुसूची को लेकर अपना चुनावी वादा पूरा न करने का आरोप लगाया था। उन्हें इस आंदोलन में लद्दाख के कोने-कोने से लोगों ने पूर्ण समर्थन दिया। आंदोलन के चलते यह पहले ही स्पष्ट हो चुका था कि भाजपा के लिए चुनाव की राह मुश्किल होगी।
लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की ओर से चलाए गए आंदोलन का व्यापक असर इस चुनाव में देखने को मिला। लद्दाख के लोगों की मांगों की अनदेखी के चलते भाजपा को इस संसदीय सीट पर खामियाजा भुगतना पड़ा।
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सोनम वांगचुक ने भाजपा पर छठी अनुसूची को लेकर अपना चुनावी वादा पूरा न करने का आरोप लगाया था। उन्हें इस आंदोलन में लद्दाख के कोने-कोने से लोगों ने पूर्ण समर्थन दिया। आंदोलन के चलते यह पहले ही स्पष्ट हो चुका था कि भाजपा के लिए चुनाव की राह मुश्किल होगी।
लद्दाख वासियों के गुस्से के चलते भारतीय जनता पार्टी ने लद्दाख संसदीय सीट जीतने के लिए मौजूदा सांसद जामयांग त्सेरिंग नामग्याल का टिकट काटा और नए प्रत्याशी को मैदान में उतारा। लेकिन यह रणनीति भी भाजपा की हार को टालने में कामयाब नहीं हो पाई। पार्टी को लग रहा था कि उम्मीदवार बदलने से लोगों का गुस्सा शांत हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
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लद्दाख के संघर्ष को आगे बढ़ाऊंगा: हनीफा जान
चुनाव जीतने के बाद मोहम्मद हाजी हनीफा जान ने कहा कि वह लद्दाख के लोगों के संघर्ष को जारी रखेंगे। अपनी चार सूत्री मांगों को वह केंद्र में बनने वाली नई सरकार के आगे पुरजोर तरीके से उठाएंगे। मो. हाजी ने विश्वास दिलाया कि समूचे लद्दाख का प्रतिनिधि होने के नाते वह धर्म के आधार पर भेदभाव न करते हुए सर्वसम्मत आधार पर फैसले लेंगे। उन्होंने केंद्र को चेताया कि उनकी जीत इस बात का पुख्ता सबूत है कि लद्दाख के लोग छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे को लेकर एकजुट हैं और इस पर कोई समझौता मंजूर नहीं।