माइनस 15 डिग्री के तापमान के बीच पर्यावरणविद सोनम वांगचुक का आमरण अनशन शुक्रवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गया। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, प्रदेश को संविधान की छठी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर वांगचुक ने छह मार्च से एक बार फिर आमरण अनशन शुरू किया है।
सोनम ने कहा, खुले आसमान में माइनस 15 डिग्री में 110 लोगों के साथ अनशन कर रहे हैं। लद्दाख पर्यावरण और संस्कृति के बचाव के लिए वे संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने मेनिफेस्टो में लद्दाख को संविधान की छठी सूची में शामिल करने का वादा कर चुके हैं, लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया है।
वांगचुक ने कहा कि छठी अनुसूची महत्वपूर्ण जनजातीय आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्रों में राज्यों को विशेष प्रशासनिक शक्तियां देती है। इसका कार्यान्वयन और लद्दाख को राज्य का दर्जा इसकी पारिस्थितिकी, पर्यावरण और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
'राजनेता केवल अगले पांच वर्षों की ही सोचते हैं'
उन्होंने कहा, 'राजनेता केवल अगले पांच वर्षों के बारे में सोचते हैं और कुछ अमीर उद्योगपतियों के लाभ के लिए पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों को बेच देते हैं। स्थानीय लोगों को पीढ़ियों तक इसका परिणाम भुगतना पड़ता है।
'चतुराई की नहीं, बुद्धिमत्ता की जरूरत'
वांगचुक ने कहा, 'जब मानव जनित आपदाएं आती हैं तो इसकी लागत उन मुनाफों से अधिक होती है, लेकिन इस बार इसका भुगतान करदाताओं के पैसे से किया जाता है। यह कहानी पूरे हिमालय में, हिमाचल से लेकर उत्तरांचल और सिक्किम तक दोहराई गई है। इसे अधिक से अधिक चतुराई ही कहा जा सकता है, बुद्धिमत्ता नहीं। हम लद्दाख में मानते हैं कि हमें चतुराई की नहीं, बुद्धिमत्ता की जरूरत है।'
पांच मार्च को गृह मंत्रालय की सब कमेटी संग बैठक रही बेनतीजा
गृह मंत्रालय की तरफ से लद्दाख के मुद्दों को लेकर बनाई गई सब कमेटी की बैठक पांच मार्च को बेनतीजा रहने के बाद से उन्होंने अपना अनशन शुरू किया है। सब कमेटी में शामिल लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) के सदस्यों ने मीटिंग के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात भी की, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए।
सूत्रों ने बताया है कि पांच मार्च को हुई बैठक में छठे शेड्यूल से संबंधित मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कानूनी विशेषज्ञों के हवाले से स्पष्ट किया की उनकी मांगों पर क्रियान्वयन में दो से तीन महीने का वक्त लगेगा। लेकिन लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के प्रतिनिधि इसे फौरन अमल में लाने पर जोर देते रहे।
इसके बाद वांगचुक ने अनशन शुरू किया। उन्हें लद्दाख के अलग-अलग हिस्सों समेत देश भर के लोगों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने 17 मार्च को लोगों से अन्य शहरों में एक दिवसीय उपवास कर आंदोलन का समर्थन करने का आग्रह भी किया है।