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दुश्मनों से बदला लेने के लिए शहीद कर्नल की पत्नी बनी सेना में अफसर

Tue, 07 Jun 2016 02:00 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला/जम्मू
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शहीद कर्नल महादिक की पत्नी स्वाति महादिक - फोटो : Amar Ujala
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पिछले साल कुपवाड़ा में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए सेना के जाबांज कर्नल संतोष महादिक की पत्नी जल्दी ही सेना में शामिल होने जा रही हैं। आपको बता दें कि शहीद कर्नल की पत्नी ने सेना में शामिल होने की इच्छा जताई थी। जिसके बाद रक्षा मंत्रालय द्वारा इस मामले को मंजूरी दे दी थी। 
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शहीद कर्नल महादिक की पत्नी स्वाति महादिक ने अपने पति के अंतिम संस्कार के वक्त सेना में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की थी। सेना में शामिल होने की उम्र से अधिक आयु होने के कारण इसमें बाधा आ रही थी। 

जिसे बाद में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सेना प्रमुख दलवीर सिंह से स्वाति को सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) की परीक्षा में आयु सीमा में छूट देने की सिफारिश की थी। एसएसबी का एग्जाम देने की उम्र 27 साल होती है। जबकि उनकी उम्र 37 साल थी। 
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पांच स्तरीय एसएसबी की परीक्षा को उत्तीर्ण किया

संतोष महादिक का अंतिम संस्कार करता उनका बेटा - फोटो : PTI
एक अंग्रेजी पोर्टल पर छपी खबर के मुताबिक सोमवार को स्वाति महादिक ने मेडिकल परीक्षा पास कर ली। स्वाति महादिक ने पिछले सप्ताह चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी के चयन के लिए होने वाली कठिन पांच स्तरीय एसएसबी की परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया था। 

37 साल की स्वाति महादिक अगले वर्ष एक कमीशन प्राप्त अधिकारी के रूप में सेना में शामिल हो जाएंगी। हालांकि स्वाति पर इस पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।

स्वाति अपने पति की मौत के एक महीने बाद ही पुणे में शिफ्ट हो गई थी। जहां पर उन्होंने सैन्य परीक्षा की तैयारी करने वाले संस्थान में दाखिला लिया था। शहीद कर्नल के भाई जयवंत घोरपडे ने बताया कि हम सब उनका सहयोग कर रहे हैं उनके बच्चों की दे्खभाल कर रहे है। 
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1998 में भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज में कमीशन हुए थे महादिक

संतोष महादिक अपने परिवार के साथ
कर्नल के एक बेटा और बेटी हैं। बेटा एक बोडिंग स्कूल में पढ़ रहा है। वहीं कर्नल की बेटी कार्तिकी को देहरादून बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया गया। 

कर्नल संतोष महादिक 41 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर थे। 1998 में भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज में कमीशन लेने वाले महाराष्ट्र के कर्नल संतोष को आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशनों में उनके कुशल नेतृत्व और अदम्य साहस के लिए सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया था। 

कर्नल संतोष 21 पैरा- स्पेशल कमांडो यूनिट में रहे और कई ऑपरेशन्स को अंजाम तक पहुंचाया। 26 जनवरी को कर्नल महादिक को मरणोंपरांत शौर्य च्रक से सम्मानित किया गया। बताते चले कि आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान कर्नल संतोष को सिर में गोली लगी थी। यह मुठभेड़ जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा से 8 किलोमीटर दूर मानीगढ़ के जंगलों में हुई थी।
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