जम्मू-कश्मीर में तेजी से बढ़ रहे किडनी से संबंधित मामलों के बीच कैडवरिक किडनी प्रत्यारोपण की मांग बढ़ी है, लेकिन अब तक देने वाला कोई नहीं मिला है। कैडवरिक में ब्रेन डेड वाले मामलों में मरीज की किडनी उसके परिजनों की सहमति से जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपण के लिए दी जाती है, लेकिन प्रदेश में ऐसे मामलों में परिजनों ही तैयार नहीं हो रहे हैं।
इसके पीछे एक बड़ा कारण कैडवरिक किडनी प्रत्यारोपण को लेकर जागरुकता की कमी है। जीएमसी जम्मू में 35 और स्किमस सोरा श्रीनगर में 10 मरीजों ने कैडवरिक किडनी प्रत्यारोपण के लिए आवेदन दिया है। प्रदेश में अब तक 85 मरीजों के लाइव किडनी प्रत्यारोपण ही हो पाए हैं। इसमें खून के रिश्ते या करीबियों में अपनों की किडनी दान की जाती है।
जम्मू-कश्मीर में रोजाना कई लोग सड़क हादसों और ब्रेन डेड आदि के शिकार हो रहे हैं। इन मामलों में परिजनों की रजामंदी पर मृतक या ब्रेन डेड वाले मामले में मरीज के महत्वपूर्ण अंगों को जरूरतमंद मरीजों के लिए दान किया जाता है। इसमें किडनी के अलावा हृदय, फेफड़े, गुर्दा, यकृत (जिगर), अग्नाशय (पैंक्रियास), नेत्र, हृदय वाल्व और त्वचा शामिल है।
जम्मू-कश्मीर में किडनी प्रत्यारोपण के लिए जीएमसी जम्मू (2022 में), जीएमसी श्रीनगर (2021 में) और स्किमस सोरा श्रीनगर (सबसे पहले) पंजीकृत है। लेकिन अभी तक सभी में लाइव किडनी प्रत्यारोपण ही हुआ है। ब्रेन डेड के मामलों में मरीज का दिमाग काम करना बंद कर देता है और वह बाद में लगभग सामान्य नहीं होता है। लेकिन उसके महत्वपूर्ण अंग काम कर रहे होते हैं, जिन्हें दान करके जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है। जीएमसी जम्मू के अधीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू में लाइव किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू की गई है और यह आयुष्मान सेहत योजना के तहत की जा रही है। जम्मू-कश्मीर में 2022 में 53 और 2023 (जुलाई तक) 32 लाइव किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं।
देश में पांच लाख मरीजों को अंग प्रत्यारोपण का इंतजार
भारत में पांच लाख मरीज अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। तमिलनाडु में सबसे अधिक अंग दान हो रहा है। देश में रोजाना 17 लोग अंग प्रत्यारोपण के अभाव में दम तोड़ते हैं।
संस्थान 2022-2023 (जुलाई तक) किडनी प्रत्यारोपण
जीएमसी जम्मू 12 05
जीएमसी श्रीनगर 02 7
स्किमस श्रीनगर 39 20
दान अंगों का इतने में होना चाहिए प्रत्यारोपण
हृदय 4 से 6 घंटे में, फेफड़े 4 से 8 घंटे में, छोटी आंत 6 से 10 घंटे में, जिगर 12 से 15 घंटे में, गुर्दा 24 से 48 घंटे और पैंक्रियास 12 से 24 घंटे में प्रत्यारोपण किया जाना चाहिए।
कैडवरिक किडनी प्रत्यारोपण के लिए लोगों में जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि देश के अन्य किसी हिस्से ने किडनी दान होने पर जरूरतमंद मरीज को समय पर प्रत्यारोपित की जा सके। ब्रेन डेड के मामलों में लोगों को अपनों के अंग दान करके जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने के लिए काम करना चाहिए। इससे बड़ा कोई नेक कार्य नहीं हो सकता है।
-डॉक्टर संजीव पुरी, संयुक्त निदेशक, सोटो (स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन)