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जम्मू-कश्मीर : बिना डॉक्टर की सलाह दवाएं लेना घातक, किडनी रोगों की गिरफ्त में आ रहे युवा

Fri, 19 Feb 2021 10:19 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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किडनी की बीमारी (सांकेतिक तस्वीर)
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जम्मू-कश्मीर में उम्रदराज लोगों के साथ युवा भी किडनी रोगों की गिरफ्त में आ रहे हैं। मधुमेह के साथ हाईपरटेंशन सहित अन्य तनाव किडनी फेलियर का कारण बन रहे हैं। इसके साथ बिना डाक्टरी परामर्श के नियमित रूप से दर्द निवारक, एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं का सेवन करना किडनी के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। अब 18-30 साल के युवाओं में भी एक्यूट किडनी फेलियर के मामले आ रहे हैं।
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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफरोलाजी विभाग में प्रतिदिन 25-30 हेमो डायलिसिस किए जा रहे हैं। यहां हर साल करीब दो हजार नए किडनी रोगों के मामले आ रहे हैं। विभाग के एचओडी डा.राजू भंडारी ने बताया कि किडनी फेल होने के कई कारण हैं। ताजा मामलों में पाया गया है कि नियमित रूप से दर्द निवारक, एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से कई युवाओं की किडनी फेल हो रही है। इसके साथ श्रम वर्ग में अधिक काम करने वाले लोगों की टिश्सू इंजूरी होती है, जिससे एक समय पाकर किडनी काम करना बंद कर देती है।

दर्द निवारक और एंटीबायोटिक लेने वाले कई मामलों में पाया गया है कि वे नियमित रूप से ऐसी दवाओं को ले रहे थे, लेकिन उनकी बीमारी और शारीरिक क्षमता के हिसाब से ऐसी दवाओं की जरूरत नहीं थी। इन्हें नान स्टेरीडायल एंटी इंफामेट्री ड्रग (एनएसएआईडीएस) कहते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं में एमिनो ग्लाइकोसाइड ग्रुप शारीरिक क्षमता को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार होता है।
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इसी तरह समाज के एक बड़े वर्ग में सामान्य दांत, घुटने, कमर, सिरदर्द की शिकायत पर लोग बिना डाक्टरी सलाह के दर्द निवारक दवाएं ले रहे हैं। कई मामलों में बड़ों के साथ बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। नेफरोलाजी विभाग में हर साल किडनी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विभाग में जनवरी 2021 में 693 हेमो डायलिसिस किए गए हैं।

अधिक सप्लीमेंट लेना भी खतरनाक
कई किडनी फेलियर मामलों में पाया गया है कि युवा जिम जाकर जल्दी मसल्स बनाने के चक्कर में शारीरिक क्षमता से अधिक सप्लीमेंट ले रहे हैं, जिससे उनके शरीर में सामान्य से अधिक प्रोटीन पहुंच रहा है, जो किडनी को नुकसान करता है। इसके अलावा इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वाले युवाओं में भी किडनी फेलियर की आशंका अधिक रहती है। इसमें उनकी किडनी में संक्रमण होने के साथ वे क्षमता से अधिक काम करती हैं।
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किडनी प्रत्यारोपण के लिए दूसरे राज्यों का सहारा

कई घोषणाओं के बावजूद सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू नहीं होपाई है। पूर्व गठबंधन सरकार के कार्यकाल में इस प्रस्ताव पर काम शुरू किया गया था, लेकिन सरकार जाने के बाद कुछ खास नहीं हो पाया है। नतीजन पीड़ितों को किडनी प्रत्यारोपण के लिए जालंधर, लुधियाना, दिल्ली, चंडीगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों में जाना पड़ रहा है। इससे समय की बर्बादी के साथ उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। फरवरी 2020 में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जम्मू में स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (सोटो) के कार्यालय को स्थापित किया गया था।
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