प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से माता खीर भवानी मेले में पहुंचे लगभग 18000 कश्मीरी पंडितों व श्रद्धालुओं के जयकारों से बुधवार को तुलमुला गूंज उठा। इस दौरान बुधवार को जेष्ठ अष्टमी पर खीर भवानी मेला हर्षोल्लास से मनाया गया। खास बात रही कि जम्मू से पहुंचे कश्मीरी पंडितों का घाटी के मुसलमानों ने फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया। कश्मीरी पंडित बोले - हम वही कश्मीर चाहते हैं। वापस यहीं आकर रहना चाहते हैं, बस बहुसंख्यक कश्मीरी मुसलमान इसका भरोसा दिलाए कि हमारे साथ कुछ बुरा नहीं होगा। कड़ी सुरक्षा के बीच हुए इस आयोजन पर उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वयं नजर बनाए रखी।
इस मेले का आयोजन इस बार दो वर्ष के बाद किया गया है। वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना के कारण यह आयोजन नहीं हो पाया था। इस दौरान कश्मीरी पंडितों ने मां के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना कर घाटी में शांति के लिए प्रार्थना की। दर्शन करने के अलावा हवन में आहुतियां भी डालीं। कश्मीरी पंडितों ने कहा कि कश्मीर में उसी भाईचारे की मिसाल पेश हो, जो सदियों से यहां कायम है। उनका यह भी कहना था कि वह कश्मीर में ही रहना चाहते हैं, लेकिन यहां के बहुसंख्यक समुदाय को उनकी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त करना हेागा।
मेले के दौरान सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध किए गए थे। जवानों को पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे, ताकि आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को विफल बनाया जा सके। वहीं, करीब एक सप्ताह से मेला स्थल और आसपास के इलाकों को सैनिटाइज किया जा रहा था। कश्मीरी पंडितों की कुल देवी मानी जाने वाली खीर भवानी में बुधवार को शाम की आरती में लगभग 2500 कश्मीरी पंडितों ने भाग लिया।
मेले में पहुंचे सतीश कौल ने कहा कि यहां हम अल्पसंख्यक हैं और हम लोग बहुसंख्यक समुदाय के सहयोग और समर्थन के बिना यहां नहीं रह सकते। बहुसंख्यक समुदाय का सहयोग भविष्य में भी मिलना चाहिए। घाटी में टारगेट किलिंग पर कहा कि उसमें केवल कश्मीरी पंडित टारगेट नहीं हुए, बल्कि सिख, मुसलमान और पुलिसकर्मी भी निशाना बने। यहां पीएम पैकेज के तहत काम करने वाले कर्मचारियों में से फिलहाल 90 प्रतिशत घाटी छोड़कर चले गए हैं। हिंदू-मुस्लिम को लेकर राजनीति होती है, लेकिन हम हमेशा यहीं पर भाईचारे के साथ रहना चाहते हैं। कौल ने कहा कि जहां वह रहते हैं, केवल एक ही घर कश्मीरी पंडित का है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ज्येष्ठ अष्टमी के मौके पर कश्मीरी पंडितों को बधाई दी है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, सभी को, विशेष रूप से मेरी कश्मीरी पंडित बहनों और भाइयों को ज्येष्ठ अष्टमी की बधाई। हम सभी की भलाई और समृद्धि के लिए माता खीर भवानी से प्रार्थना करते हैं। एजेंसी
खीर भवानी मेले में पहुंचने वाले कशमीरी पंडितों और श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग बाहें फैलाकर खड़े नजर आए। जो भी भक्त दरबार में पहुंचा, उसका फूल मालाओं से स्वागत किया गया। इसके साथ ही एक बार फिर भाईचारे की मिसाल का संदेश पूरे विश्व में पहुंचाया। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता बिलाल भट ने कहा कि पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है। हम बेसब्री से अपने कश्मीरी पंडित भाइयों का इस्तकबाल करने का इंतजार कर रहे थे। हम चाहते हैं कि वो बिना खौफ यहां आएं और उन्हें वैसा ही महसूस हो, जैसा पहले होता था। भट ने कहा कि कश्मीर के हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल के हमेशा उदाहरण दिए जाते रहे हैं और हम चाहते हैं कि वह उदाहरण भविष्य में भी दिए जाएं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने कहा कि टारगेट किलिंग के बावजूद इतनी संख्या में परिवार सहित लोगों का पहुंचना बताता है कि कायर (आतंकवादी) अमन शांति को रोक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि हमने पूजा का सामान भी कश्मीरी मुसलमान से ही लिया। डॉ. निर्मल सिंह ने कहा कि यहां कोई डर नहीं है। काफी संख्या में कश्मीरी पंडित और हिंदू लोग पहुंचे, जिनका स्थानीय मुसलमान हर तरह से सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो कायर हमारी सेना का मुकाबला नहीं करते, इसलिए वो निहत्थे लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह स्थानीय कश्मीरी लोगों ने राहुल भट की हत्या की निंदा की और कैंडल मार्च निकाला यह एक कड़ा संदेश गया है पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं को।
ज्येष्ठ आष्टमी पर जानीपुर स्थित मां राघेन्या के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ा। यहां हजारों की संख्या में कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों ने पूजा-अर्चना कर कश्मीर घाटी में वापसी की कामना की। मंदिर में सुबह पांच बजे से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात जारी रहा। मंदिर में सुबह साढ़े पांच बजे पूजा शुरू हुई। वहीं, साढ़े छह बजे हवन शुरू हुआ। इस दौरान कश्मीरी पंडितों ने आहुति डालकर मां राघन्या से खुशहाली और कश्मीर घाटी में वापसी की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर मां के जयघोष गूंजते रहे। इस दौरान दर्शन के लिए लंबी कतारें भी लगी रहीं। मां के दर्शन के पहुंचे शाम लाल पंडिता ने कहा कि इच्छा तो तुलमुला जाने की थी, लेकिन घाटी के अशांत माहौल के कारण नहीं जा सका। यहां बच्चों के साथ पहुंचे। बच्चों को पता चला की उनकी संस्कृति कितनी समृद्ध है। इस दौरान भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में खीर का वितरित किया गया।