सांबा। केंद्र व जम्मू-कश्मीर की सरकारों का आम लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के दाव हवा हवाई होता जा रहा है। भूविज्ञान एवं खनन विभाग की नाक तले जिले से खनन माफिया अवैध खनन कर लाखों रुपये की चांदी कूट रहे हैं। जिला प्रशासन कुछ भी कर पाने में असहाय लग रहा है।
आलम यह है कि बसंतर व देविका नदियों से रात दिन खनन किया जा रहा है। जबकि विभाग केवल इक्का-दुक्का वाहनों को ही जब्त कर जुर्माने कर खानापूूर्ति कर रहा है। जानकारी के अनुसार घगवाल के बंई नाला व सांबा की बसंतर नदी के पुलिस लाइन, पैंठी, नड व धलोट आदि क्षेत्रों में धड़ल्ले से खनन माफिया विभाग के कुछ अधिकारियों की मिली भगत से दिन में भी खनन कर रहे हैं। अवैध खनन करना बिना विभागीय अधिकारियों के संभव ही नहीं है। यही नहीं धलोट क्षेत्र में निर्माणाधीन चेकडैम के आसपास से भी खनन जोरों पर है। वहीं किसानों की खेती को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कुछ दिन पहले भी किसानों ने खनन माफिया के खिलाफ प्रदर्शन कर डीसी को अपनी समस्या से अवगत कराया था, लेकिन खनन माफिया पर कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। जब स्थानीय लोग रेत बजरी के लिए सरकारी दाम के बारे में कहते हैं तो उन्हें भगा दिया जाता है। जिले के लोगों को रेत बजरी नहीं दी जा रही है।
सूत्रों अनुसार खनन माफिया ने खनन का नया तरीका भी ढूंढ लिया है। किसी की जगह लेकर रेत को डंप कर देते हैं। वहीं से ऊंचे दाम पर बेचते रहते हैं। विभाग के अधिकारी इन रेत डंप करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं करते। जैसे रेत लाखों की हो और जुर्माना हजारों में होता है। इतना ही नहीं जब्त की गई रेत को चालान के बाद उसे ही दे दिया जाता है, ताकि वह उस रेत को बेच सके।
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सांबा में 6 ब्लॉक खनन के लिए खोले गए हैं। जिनमें 2 बसंतर, 3 देविका और 3 बईं में है। वहीं 2 ब्लॉक सरकारी काम के लिए हैं। वहीं रेत का सरकारी दाम 3.75 रुपये व बजरी का 3.85 रुपये निर्धारित है। खनन ठेकेदारों को कहा गया है कि वह सरकारी रेट पर ही रायल्टी वसूलें अन्यथा उन पर कार्रवाई की जाएगी। रात्रि के समय चोरी हो रही है। पुलिस के साथ रात्रि को भी नाके लगा रहे हैं।
-कुलवंत सिंह भाऊ, जिला भू विज्ञान व खनन अधिकारी, सांबा