जम्मू कश्मीर के मीरवाइज़ मौलवी उमर फारूक ने शुक्रवार को यहां कहा कि लगातार दूसरे शुक्रवार को भी उन्हें उनके निगीन स्थित घर में नज़रबंद रखा गया और जुमे की नमाज़ पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि वह शासकों को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि हमारे शहीदों की स्मृति उनके द्वारा नियंत्रित नहीं की जा सकती।
मीरवाइज़ ने एक्स पर लिखा है कि, लगातार दूसरे शुक्रवार को मैं घर में नजरबंद हूं। मेरे आवास की हर गली और उप-गली पर बैरिकेडिंग की गई है, जिससे पूरे मोहल्ले को असुविधा हो रही है। मैं शासकों को स्पष्ट कर दूं, हमारे शहीदों की स्मृति उनके द्वारा नियंत्रित नहीं की जा सकती। यह हमारे दिलों में बसती है। तथ्यों और इतिहास को लॉकडाउन करके और लोगों को कब्रिस्तानों में जाने से रोककर या मुझे शुक्रवार को जामिया मस्जिद जाने से रोककर नहीं मिटाया जा सकता है। न ही तुष्टीकरण की कहानियों या शर्मनाक सांप्रदायिक विकृतियों से इसे मिटाया जा सकता है अगर यह लोगों की सामूहिक स्मृति में रहता है, जो कि यह है।