-पूर्व डिप्टी सीएम की लद्दाख के एलजी के रूप में तैनाती से भाजपा को बड़ी उम्मीद
-राजनीतिक आकांक्षाओं को साधने के साथ ही क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने में लाभ लेने की होगी कोशिश
प्रवेश कुमारी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम कविंद्र गुप्ता को लद्दाख का एलजी बनाकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। यह कोई अप्रत्याशित कदम नहीं, बल्कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की सोची-समझी रणनीति है। बतौर एलजी कविंद्र गुप्ता की लद्दाख में तैनाती से पार्टी न सिर्फ अपनी राजनीतिक आकांक्षाएं साधने का प्रयास किया है, बल्कि क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने में भी उनके लंबे अनुभव का लाभ लेने की कोशिश की है।
वर्ष 2019 में लद्दाख के अलग यूटी बनने के बाद यहां के एलजी का जिम्मा पूर्व आईएएस राधा कृष्ण माथुर को सौंपा गया था। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले माथुर केंद्र सरकार में रक्षा सचिव रह चुके थे। करीब चार साल यूटी प्रशासन चलाने के बाद 2023 में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा को यह अहम जिम्मा सौंपा गया। मिश्रा अच्छे प्रशासक साबित हुए।
जानकार बताते हैं कि प्रदेश में इधर भाजपा की सियासी जरूरतों की दृष्टि से इस पर किसी अनुभवी व्यक्ति की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में पार्टी इस पद पर किसी राजनीतिक व्यक्ति को बिठाना चाहती थी। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम कविंद्र गुप्ता उसकी कसौटी पर खरे उतरे। गुप्ता को लद्दाख का एलजी बनाए जाने से जहां स्थानीय निवासियों का यह अफसोस खत्म होगा कि उनके ऊपर बाहर से लाकर लोगों को बिठाया जाता है, वहीं लद्दाख के मुख्य सचिव डॉ. पवन कोतवाल के भी जम्मू से होने के मद्देनजर उम्मीद की जा सकती है कि उनका कविंद्र गुप्ता से ताल-मेल बेहतर रहेगा।
लद्दाखवासी काफी समय से अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में कविंद्र से उम्मीद रहेगी कि वे इन क्षेत्रीय मुद्दों का कोई सर्वमान्य हल निकालने की कोशिश करेंगे। लद्दाख मामलों पर बनी हाईपावर कमेटी के को-चेयरमैन चेरिंग दोरजे लकरुक पहले भी कविंद्र गुप्ता के साथ काम कर चुके हैं। वे पीडीपी-भाजपा गठबंधन में कैबिनेट मंत्री थे। ऐसे में कविंद्र गुप्ता से अच्छी ट्यूनिंग लद़्दाख के क्षेत्रीय लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।
भाजपा की लद्दाख में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की भी कोशिश
कविंद्र गुप्ता के जरिए भाजपा लद्दाख में अपना राजनीतिक आधार भी बढ़ाने की कोशिश करेगी। लद्दाखवासियों के एंटी सेंटिमेंट्स के चलते 2024 के लोकसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी बदलने के बावजूद भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा था। यहां से निर्दलीय मोहम्मद हनीफा जान सांसद बने थे। ऐसे में कविंद्र के सहारे भाजपा अपनी जमीन मजबूत बनाने की कोशिश करेगी।
वहीं, हाल ही में राष्ट्रपति की ओर से प्रदेश में सिविल सेवाओं में ग्रुप-ए के पदों पर नियुक्तियों का अधिकार एलजी को सौंपा गया है। ऐसे में कविंद्र गुप्ता को लद्दाख का उप राज्यपाल बनाए जाने के बाद लद्दाख में बड़े पैमाने पर नए प्रशासनिक बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।