रसाना में दुष्कर्म के बाद मारी गई बच्ची सात वर्ष से अपने मामा के साथ रह रही थी। मामा ने भांजी को गोद लिया था, क्योंकि एक सड़क दुर्घटना में मामा के तीन बच्चों की मौत हो गई थी। वह भांजी को अपनी बेटी की तरह रखना चाहता था।
लेकिन मामा द्वारा गोद ली गई बच्ची की परवरिश से उसका पिता नाखुश था और उसने पूरी तैयारी कर ली थी कि इस बार कारगिल की तरफ रुख करने से पहले बच्ची को वापस ले आएगा। इससे पहले की बच्ची को वापस लाते इंसानियत के दुश्मनों ने उसको अपनी हवस का शिकार बनाने के साथ हत्या कर दी।
बच्ची के पिता ने बताया कि जब मामा ने एक वर्ष की उम्र की बच्ची को गोद लिया था तो भरोसा दिलाया था कि वह बच्ची को अपनी बच्ची की तरह पालेगा। उसको अपने बच्चों की तरह स्कूल में शिक्षा दिलाकर उसका भविष्य उज्ज्वल बनाएगा, लेकिन मामा ने बच्ची को पढ़ाने के बजाए घर के काम में लगा दिया।
जब कारगिल में दोनों डेरे साथ में रहते थे तो उस समय अक्सर बच्ची बताती थी कि उससे काम कराया जाता है, लेकिन उनको लगा कि जब उसकी उम्र होगी तो पालने वाले स्कूल में भी भेजेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बच्ची के मामा ने अपने दोनों बेटों को स्कूल में भर्ती किया, लेकिन उसको घोड़े चराने में लगा दिया।
कई वर्षों से वह यह सब देखते रहे। कई बार उन्होंने मामा से बच्ची को वापस लेने की बात कही, लेकिन वह बच्ची को देने को तैयार नहीं होता और रोना-धोना शुरू कर देता, लेकिन इस बार उन्होंने निर्णय कर लिया था कि वह बेटी को वापस ले लेंगे।
इसके बारे मामा को बता भी दिया था, लेकिन वापस लेने से पहले ही यह हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि जब 10 जनवरी को बच्ची गायब हुई तो मामा उन पर ही आरोप लगाने लगा कि आप बिना बताए बच्ची को वापस ले गए हैं, लेकिन उन्होंने बताया कि उन्होंने बच्ची को नहीं लिया।
अगर लिया होता तो बताकर ले जाते। पिता को आज अफसोस हो रहा है कि उसने बेटी को पहले ही वापस क्यों नहीं लिया। अगर वापस ले लिया होता तो आज उसकी बेटी उसके साथ जीवित होती।