पत्रकारों से बात करते सिमरनजीत सिंह मान। संवाद
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कठुआ। शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रमुख सिमरनजीत सिंह मान जिला सेशन कोर्ट से जम्मू-कश्मीर में प्रवेश की इजाजत नहीं मिलने के बाद तीन दिन बाद पंजाब लौट गए। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 14 नवंबर को तय की है। वह सोमवार से लखनपुर में धरने पर बैठे हुए थे। वापस लौटने से पहले मान ने कहा कि उन्हें जम्मू-कश्मीर में प्रवेश की इजाजत नहीं मिली, धारा 144 लगा दी गई, यह अफसोसजनक है।
मान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ऐसे हालात अफसोस का विषय है। सरकार उन्हें कानूनी प्रक्रिया में उलझाए रखना चाहती थी। लंबी तारीख दी गई है। जम्मू-कश्मीर में उन्हें दाखिल होने से रोककर लोकतंत्र का नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। बतौर सांसद उन्हें कहीं भी आने जाने की अनुमति है, लेकिन देश के इस हिस्से में उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है जो शर्मनाक है।
मान को सोमवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रवेश द्वार लखनपुर में ही अशांति की आशंका के चलते रोक दिया था। इसके बाद वह समर्थकों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन ने उन्हें अनुमति न देने के साथ धारा 144 भी लगा दी थी। प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ मान ने अदालत का रुख किया था। कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अधिवक्ता टीएन गुप्ता के माध्यम से एक याचिका दायर कर जिला मजिस्ट्रेट के जम्मू-कश्मीर में प्रवेश से इन्कार करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। गुप्ता ने कहा कि मान ने आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि उन्हें कुछ दिन पहले केंद्र शासित प्रदेश की यात्रा के लिए मंजूरी दी गई थी। वीरवार को अदालत से उन्हें जम्मू-कश्मीर में दाखिल होने के संबंध में राहत नहीं मिल सकी। ऐसे में लंबी अवधि को देखते हुए मान को पंजाब लौटना पड़ा है।
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भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रधान का इस्तीफा
इस बीच भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के कठुआ जिला प्रधान जसप्रीत सिंह ने मान के समर्थन में पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान चरणजीत सिंह भोला ने कहा कि सरकार के इस तरह के फैसलों के खिलाफ संविधान के दायरे में संघर्ष जारी रहेगा।