उन्होंने कहा कि पीड़िता के परिवार के लिए प्रत्येक दिन पहाड़ों की तरह होता है। इसलिए ऐसे मामलों में न्याय प्रक्रिया तेज होनी चाहिए और अभियुक्तों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए ताकि इससे समाज के असामाजिक और आपराधिक तत्वों को सबक मिले।
कहा कि रसाना मामले में एक आरोपी को सजा के अभाव में बरी कर दिया गया। इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। पठानकोट से सजा सुनाए जाने के बाद पीड़िता के पिता ने सजा बढ़ाने की मांग की थी। साथ ही एक आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। इस पर कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार तथा छह दोषियों को जवाब दाखिल करने को कहा था।
पठानकोट की जिला और सत्र अदालत ने रसाना मामले में छह लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने अपराध के साजिशकर्त्ता सांझी राम, एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) दीपक खजुरिया, और परवेश कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई। एसपीओ सुरेंद्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता को पांच-पांच साल कैद का आदेश दिया था। हालांकि, सांझी राम के बेटे को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया था।