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हैदराबाद मामले पर कठुआ कांड का पीड़ित परिवार बोला- परिवार के साथ हुआ न्याय, मौत ही मिलनी चाहिए थी

Sat, 07 Dec 2019 03:27 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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हैदराबाद कांड के आरोपी ढेर
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जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के रसाना में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की शिकार आठ वर्षीय बच्ची के परिवार ने हैदराबाद में महिला डाक्टर के साथ दुष्कर्म के आरोपियों के मुठभेड़ में मारे जाने पर संतोष जताया है। कहा कि कम से कम उस पीड़िता के परिवार को लंबे मुकदमे का दंश नहीं झेलना पड़ेगा। उन्हें चारों आरोपियों के मुठभेड़ में मारे जाने की प्रसन्नता है। यदि उन्होंने गलत किया था तो उन्हें मौत ही मिलनी चाहिए थी।

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रसाना पीड़िता के पिता व माता ने सांबा में अपने घर पर बताया कि अगर ये लोग अपराधी थे तो मुझे लगता है कि पीड़िता और उसके परिवार के साथ न्याय हुआ है। उन्होंने जो कुछ भी किया उसके लिए वे मौत के हकदार थे और कम से कम उस परिवार को आरोपियों के बरी होने का डर तो नहीं होगा।

कहा कि मेरी बेटी का मामला उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर पठानकोट की एक अदालत में चला और लंबे मुकदमे के बाद मुख्य अभियुक्तों में से एक को रिहा कर दिया गया। एक अन्य जिसे किशोर बताया जा रहा है उस पर मुकदमा चल रहा है। उसे सजा होगी या नहीं, इस पर वह निश्चिंत नहीं है।

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पीड़िता के परिवार के लिए प्रत्येक दिन पहाड़ों की तरह होता है

उन्होंने कहा कि पीड़िता के परिवार के लिए प्रत्येक दिन पहाड़ों की तरह होता है। इसलिए ऐसे मामलों में न्याय प्रक्रिया तेज होनी चाहिए और अभियुक्तों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए ताकि इससे समाज के असामाजिक और आपराधिक तत्वों को सबक मिले।

कहा कि रसाना मामले में एक आरोपी को सजा के अभाव में बरी कर दिया गया। इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। पठानकोट से सजा सुनाए जाने के बाद पीड़िता के पिता ने सजा बढ़ाने की मांग की थी। साथ ही एक आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। इस पर कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार तथा छह दोषियों को जवाब दाखिल करने को कहा था।

पठानकोट की जिला और सत्र अदालत ने रसाना मामले में छह लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने अपराध के साजिशकर्त्ता सांझी राम, एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) दीपक खजुरिया, और परवेश कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई। एसपीओ सुरेंद्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता को पांच-पांच साल कैद का आदेश दिया था। हालांकि, सांझी राम के बेटे को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया था।
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