उनका कहना है कि पुलिस के एएसपी सांबा नवीद पीरजादा ने पहले से ही दौरा कर घटनास्थल पर छानबीन कर ली थी। नवीद को आईजीपी जम्मू के आदेश पर एसआईटी का इंचार्ज बनाया गया था। नाबालिग के शव को 17 जनवरी को रिकवर करने के करीब 15 दिन बाद बाल, खून के धब्बे, गले के हार का हेड, सांझीराम के घर से लकड़ी की हत्थी से तैयार राड बरामद की। बाल को नाबालिग और आरोपी के बाल को मिलाया गया। नई दिल्ली स्थित फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट आई, जिसमें बाल से दोनों के मौके पर होने की पुष्टि हुई। अधिवक्ता बसोत्रा कहते हैं कि फोरेंसिक के इस सबूत को कोर्ट में बहुत मजबूत नहीं माना जाता। क्राइम ब्रांच को इसके साथ कई और ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे।
बार एसोसिएशन के उपप्रधान एडवोकेट सचिन गुप्ता और मुनीष चोपड़ा के अनुसार क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट शक पैदा कर रही है। नाबालिग को इंसाफ दिलाने के बजाय केस उलझाया गया है। इंसाफ दिलाने के लिए जांच सही करना क्राइम ब्रांच का फर्ज बनता था। शक के दायरे में पहले से आई क्राइम ब्रांच से केस को सीबीआई को देने की मांग की गई थी। इस चालान पर केस चलेगा तो सही आरोपियों को सजा नहीं मिल पाएगी।
केवल मामले के राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए भाजपा और पीडीपी ने इस मुद्दे को हवा देकर मासूम लड़की से और अत्याचार किया है। उसे इंसाफ दिलाने के लिए ही वकीलों ने आंदोलन किया है।