इससे पहले वीरवार को टीम ने कठुआ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। साथ ही रसाना गांव जाकर देवस्थान का मुआयना किया था जहां बच्ची के साथ रेप की बात कही जा रही है। आरोपी सांझी राम के परिवार वालों से बात करने के साथ ही रसाना गांव के लोगों से भी घटना के विषय में जानकारी हासिल की थी। बताते चलें कि बार काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये जांच दल यहां भेजा था। जांच दल की रिपोर्ट काउंसिल के जरिए सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।
कोर्ट में लगे भारत माता की जय के नारे
करीब एक घंटे तक वकीलों ने भारत माता की जय, बार एसोसिएशन जम्मू जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इस बीच मीडिया और सरकारी वकीलों को बार रूम में नहीं जाने दिया गया। तीन गाड़ियों में हाईकोर्ट पहुंचे टीम के सदस्य शुक्रवार दोपहर बाद दिल्ली लौट गए।
टीम ने पूछा क्यों रोका महिला वकील को?
बार काउंसिल की टीम ने बार एसोसिएशन के सदस्यों से हाईकोर्ट में पीड़ित बच्ची की महिला एडवोकेट को पेश होने से रोकने व बार प्रधान की ओर से धमकी देने के बारे में पूछा।
बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट भूपेंद्र सिंह सलाथिया ने कहा कि बार एसोसिएशन की छवि को धूमिल करने के लिए उन पर आरोप लगाए गए हैं। एडवोकेट दीपिका सिंह रजावत ने पीड़ित बच्ची के परिवार की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका पेश की थी। वह हाईकोर्ट में हर तारीख पर पेश हुई हैं। हर सुनवाई के दिन उनकी मौजूदगी के रिकार्ड हैं। उन्हें कभी- किसी ने नहीं रोका और न कोई धमकी दी है।
बार ने एक दिन पहले रसाना पहुंचने का किया था आग्रह
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि बार ने टीम से आग्रह किया था कि वह एक दिन पहले रसाना पहुंचे। पहले उनका कार्यक्रम 20 अप्रैल को पहुंचने का था। उनके आग्रह पर ही टीम एक दिन पहले 19 अप्रैल को पहुंची थी। कठुआ बार एसोसिएशन ने भी अपना पक्ष रखा है। टीम ने रसाना का भी दौरा किया। करीब एक हजार वकीलों की मौजूदगी में दस्तावेजों को सौंपा गया कि क्यों बार सीबीआई को केस सौंपने के पक्ष में है।